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Shimla News: अधिवक्ता विनय की जमानत के विरोध में दायर प्रदेश सरकार की याचिका खारिज

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विशेष न्यायाधीश डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा की अदालत का फैसला, पूर्व मुख्य सचिव की शिकायत पर दर्ज मामले में दी है अग्रिम जमानत
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सरकार ने दी थी जमानत की शर्तों के उल्लंघन की दलील
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा की अदालत ने अधिवक्ता विनय शर्मा से जुड़े मामले में राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है। इसमें पूर्व मुख्य सचिव की शिकायत पर दर्ज मामले में आरोपी विनय शर्मा को दी अग्रिम जमानत को रद्द करने की मांग की थी।

अदालत ने स्पष्ट किया है कि जमानत की शर्तों का दायरा केवल वर्तमान एफआईआर की जांच के विवरण और उसके परिणाम तक ही सीमित था, उसे सरकार या मुख्यमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर लागू नहीं किया जा सकता। मामला 30 मई 2026 को थाना ईस्ट शिमला में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। यह एफआईआर पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता की लिखित शिकायत पर बीएनएस की धाराओं 248, 351 और 356 (2) के तहत दर्ज की गई थी। आरोपी अधिवक्ता विनय शर्मा ने गिरफ्तारी की आशंका के चलते 24 जून 2026 को अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। इस पर 4 जुलाई 2026 को अदालत ने कुछ शर्तों के साथ उसे जमानत दे दी थी।
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राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि आरोपी ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है। आरोप लगाया गया कि आरोपी ने फेसबुक पर सरकार और माननीय मुख्यमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के निराधार आरोप लगाए और सोशल मीडिया पर सामग्रियां साझा कीं। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि आरोपी के खिलाफ राज्य के विभिन्न थानों में पांच अन्य एफआईआर दर्ज हैं। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि इस शर्त को राज्य सरकार या मुख्यमंत्री के खिलाफ सामग्री प्रकाशित करने पर रोक के रूप में नहीं खींचा जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि ऐसी सामग्री किसी आपराधिक कानून का उल्लंघन करती है, तो प्रभावित पक्ष या राज्य कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन इसे वर्तमान एफआईआर की जमानत शर्त का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। इसके साथ अदालत ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। संवाद
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