हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सचिवालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। खंडपीठ ने कहा कि मुख्य सचिव, कार्मिक और सामान्य प्रशासन के सचिव ने जानबूझ कर अदालत के निर्णय को लागू नहीं किया है। अदालत ने पाया कि 12 वर्ष का समय बीत जाने पर भी याचिकाकर्ताओं को वरिष्ठ सहायक के पद पर पदोन्नति का लाभ नहीं दिया गया। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने निर्णय को लागू करने के लिए प्रतिवादियों को चार हफ्ते का समय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि इस अवधि में अदालत के निर्णय को लागू नहीं किया गया तो उस स्थिति में याचिकाकर्ता अदालत के समक्ष आवेदन दायर कर उनकी संपत्ति का ब्योरा दायर करें, जिससे दोषी अधिकारियों की संपत्ति और वेतन को कुर्क किया जा सके। अदालत ने वरिष्ठ सहायक के पद पर पदोन्नति का लाभ देने के साथ-साथ वित्तीय लाभ अदा करने के आदेश दिए हैं।
मामले के अनुसार 2008 में याचिकाकर्ता राम प्रकाश और 20 अन्य ने कनिष्ठ सहायक से वरिष्ठ सहायक के पद पर पदोन्नति की गुहार लगाई थी। अदालत ने यह स्पष्ट किया था कि पुराने पदों को पुराने नियमों के आधार पर पदोन्नत किया जाए। उसके बाद याचिकाकर्ताओं ने प्रशासन के पास प्रतिवेदन के माध्यम से उन्हें पदोन्नत करने की मांग की। दलील दी गई कि उनसे कनिष्ठ को पदोन्नति का लाभ दिया गया है। प्रशासन ने वर्ष 2010 में उनके प्रतिवेदन को खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ताओं ने इस निर्णय को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने वर्ष 2012 में उन्हें वरिष्ठ सहायक के पद पर पदोन्नत करने का निर्णय सुनाया था। एकल पीठ के इस निर्णय को सरकार की ओर से खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी गई। सरकार की अपील को खंडपीठ ने वर्ष 2014 में खारिज कर दिया था। उसके बाद भी याचिकाकर्ताओं को पदोन्नति का लाभ नहीं दिया गया। मजबूरन उन्हें अदालत के निर्णय को लागू करने के लिए याचिका दायर करनी पड़ी। अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि सचिवालय प्रशासन ने जानबूझ कर अदालत के निर्णय को लागू नहीं किया है।
हत्या में नामित आरोपियों की जमानत हाईकोर्ट से खारिज
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में नामित तीन आरोपियों की जमानत खारिज कर दी है। न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने अपने निर्णय में कहा कि याचिकाकर्ताओं पर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। जमीन के विवाद के कारण विपिन कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोपियों के खिलाफ पुलिस थाना सदर ऊना में भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 120 बी और शस्त्र अधिनियम में मामला दर्ज है। अभियोजन पक्ष के अनुसार एक अप्रैल 2021 को विपिन अपने खेत में मजदूरों से काम करवा रहा था। उसी समय आरोपी गाड़ी में आए और उसे गोली मार दी। मामले की जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अतिरिक्त न्यायाधीश ऊना की अदालत में चालान पेश कर दिया है। जमानत याचिका में दलील दी गई थी कि आरोपियों के मामले की सुनवाई जल्दी नहीं हो रही है। अदालत ने कहा कि आरोपी यह साबित करने में नाकाम रहे हैं कि उनके मामले को जानबूझ कर जल्दी नहीं निपटाया जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि हालांकि अभियुक्त के लिए जल्दी सुनवाई का अधिकार सांविधानिक है, लेकिन यह बहुत सारे पहलुओं पर निर्भर करता है।