कुल्लू जिले के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोग सड़क सुविधा न होने के चलते मरीजों के कुर्सी पर उठाकर मीलों सफर करने को मजबूर हैं। ऐसा ही मामला सोमवार को सैंज घाटी की गाड़ापारली पंचायत में सामने आया है।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोग सड़क सुविधा न होने के चलते मरीजों के कुर्सी पर उठाकर मीलों सफर करने को मजबूर हैं। ऐसा ही मामला सोमवार को सैंज घाटी की गाड़ापारली पंचायत में सामने आया है। बनाउगी गांव के 62 वर्षीय बुजुर्ग मनी राम की अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने पहले घरेलू उपचार से ही दर्द ठीक करने प्रयास किया। लेकिन तेज बुखार के चलते मनी राम की हालत गंभीर हो गई। इसके बाद परिजनों व ग्रामीणों ने हौसला दिखाते हुए कुर्सी पर ही दो डंडों के सहारे मरीज को सात किमी दूर जंगला बिहाली में पहुंचाया। यहां से मरीज को वाहन के माध्यम सैंज अस्पताल ले गए। जहां पर उनका उपचार चल रहा है।
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सड़क न होने के चलते बारिश के बीच फिसलन भरे रास्ते से परिजनों को मरीज को कुर्सी पर उठाना पड़ा। हर बार यहां के ग्रामीणों को इस तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है। बनाउगी गांव सड़क से नहीं जुड़ पाया है। मजबूरी में लोग मरीजों को पीठ व चारपाई पर उठाकर सड़क तक लाने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों में ज्ञानचंद, दुनी चंद, उत्तम चंद, शेर सिंह, भाग सिंह, हीरा लाल ने कहा कि गांव तक सड़क न होने के कारण गाड़ापारली पंचायत के बाशिदों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मांग करते हुए कहा है कि गांव को जल्द सड़क से जोड़ा जाए। सैज संघर्ष समिति के अध्यक्ष महेश शर्मा ने कहा कि समिति द्वारा कई बार प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन दिया। लेकिन सरकार इस पर कोई अमल नहीं कर रही है। ग्राम पंचायत गाड़ापारली की प्रधान यमुना देवी ने कहा कि पंचायत द्वारा लोक निर्माण विभाग को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है।