कुर्सी पर उठाकर 10 किमी दूर सड़क तक पहुंचाया मरीज
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स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े-बड़े दावे हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की सैंज घाटी में बेमानी दिखते हैं। सैंज घाटी की दुर्गम पंचायत गाड़ापारली में सुविधाओं का अभाव है। यहां कोई व्यक्ति बीमार हो जाए तो उसे पालकी या कुर्सी पर उठाकर अस्पताल तक पहुंचाना पड़ता है। ऐसा ही मामला शुक्रवार देर शाम को पेश आया। दरअसल मझाण निवासी तेजा सिंह को अचानक पेट में दर्द शुरू हुआ। इस पर परिजनों ने उन्हें अस्पताल ले जाने का फैसला किया। गांव तक सड़क न होने के कारण ग्रामीण ऊबड़-खाबड़ रास्ते से मरीज को कुर्सी पर बिठाकर सड़क तक लाए। उन्हें मरीज को गांव से निहारणी तक उठाकर लाने में छह से सात घंटे लग गए। यह दूरी करीब दस किलोमीटर है। इसके बाद मरीज को सीएचसी सैंज में उपचार दिया गया।
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गौरतलब है कि गाड़ापारली पंचायत में एक माह के बीच चार मरीजों को कुर्सी पर उठाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ा है। इनमें तीन महिलाएं और एक पुरुष मरीज शामिल हैं। पंचायत में स्थित पीएचसी बाह में सालों से ताला लटका है। स्थानीय निवासी हरिराम, राकेश, निमत राम, डाबे राम, मोती राम पालसरा और दिनेश ने कहा कि पंचायत का एक भी गांव सड़क से नहीं जुड़ पाया है। बार-बार मांग के बावजूद समस्या जस की तस है। पंचायत के पैदल रास्ते भी खस्ताहाल हैं।
ग्रामीणों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गाड़ापारली पंचायत की प्रधान यमुना देवी ने कहा कि ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं को मुहैया करवाने की प्रशासन और सरकार से लगातार मांग कर रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधि भी कई बार सड़क निर्माण की प्रशासन से मांग कर चुके हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों को सुविधा नहीं दी गई है। लोगों का कहना है कि सड़क, स्वास्थ्य और दूरसंचार सेवाएं न होने से ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आजादी का महोत्सव मनाया जा रहा है, गाड़ापारली के सैकड़ों ग्रामीण 75 साल बाद भी सुविधाओं के अभाव में जीने के लिए मजबूर हैं।