टैक्सी ऑपरेटरों ने दी उग्र आंदोलन की धमकी
पहले से चल रहे आंदोलन में भी हो सकते हैं शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। टैक्सी परमिट की अवधि 12 से बढ़ाकर 15 साल करने की मांग को लेकर बुधवार को परिवहन विभाग के अधिकारियों और टैक्सी ऑपरेटर यूनियन पदाधिकारियों के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही।
यूनियन ने धमकी दी कि मांगें नहीं मानी गई तो प्रदेशभर के टैक्सी ऑपरेटर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। शिमला में पहले से चल रहे आंदोलन में भी उनकी यूनियनें शामिल हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि जिन टैक्सियों के परमिट की अवधि केवल एक साल बची है, उनमें जीपीएस लगाने का फैसला ऑपरेटरों को मंजूर नहीं है। अतिरिक्त मुख्य सचिव जनजातीय विकास एवं परिवहन ओंकार शर्मा ने ऑपरेटरों के समक्ष परमिट अवधि बढ़ाने के लिए ऑल इंडिया टैक्सी परमिट लेने और निर्धारित शुल्क जमा करने की शर्त रखी। यूनियन पदाधिकारियों ने इसका विरोध किया।
बैठक में शामिल ऑपरेटरों ने स्पष्ट किया कि वह बिना किसी अतिरिक्त शर्त के वाहन की फिटनेस के आधार पर परमिट अवधि 15 साल किए जाने की मांग कर रहे हैं। सरकार की शर्त को वह परिवहन मंत्री के समक्ष उठाएंगे। मांग नहीं मानी तो प्रदेशभर के टैक्सी ऑपरेटर सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करेंगे। बैठक में राजधानी टैक्सी, मैक्सी ऑपरेटर वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष जितेंद्र ठाकुर, जिला सचिव संदीप कंवर, देवभूमि टैक्सी ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष अजय ठाकुर और संस्थापक नरेंद्र ठाकुर तथा ऑल हिमाचल कमर्शियल व्हीकल ज्वाइंट एक्शन कमेटी के अध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर शामिल हुए। उन्होंने बताया कि ऑल इंडिया टैक्सी परमिट के तहत चार सीट वाली टैक्सी के लिए 25 हजार रुपये, छह से 12 सीट क्षमता वाले वाहन के लिए 50 हजार रुपये और 12 से 21 सीट क्षमता वाले वाहनों के लिए 75 हजार रुपये सालाना शुल्क देना होगा। ऑपरेटरों का कहना है कि जो टैक्सियां केवल शिमला या हिमाचल में चलनी हैं, उनके लिए इतनी भारी-भरकम फीस देना उचित नहीं है।