कलाकारों के दमदार अभिनय पर खूब बजीं तालियां
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। गेयटी थियेटर में शुक्रवार को नाट्य उत्सव शुरू हो गया। इसका आयोजन स्टेपको नाहन और शाख मंडी के सौजन्य से किया जा रहा है।
पहले दिन संबोधन और पतझड़ के बाद नाटक का मंचन हुआ। संबोधन नाटक में एक 22 वर्षीय बेटी की अपने पिता से पहली मुलाकात को दिखाया है। संबोधन नाटक में दिखाया है कि बेटी की मां श्रद्धा रंगमच की अभिनेत्री हैं और पिता राज समाजसेवी। राज श्रद्धा से एक बेटी चाहता है लेकिन श्रद्धा अपना कॅरिअर बनाना चाहती हैं, दोनों अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीना चाहते हैं। इस अहंकार और रिश्तों के अधूरेपन में दोनों अलग हो जाते हैं। दोनों जब अलग होते हैं तो राज को पता नहीं था कि श्रद्धा गर्भ से है। श्रद्धा को जब रिश्तों की अहमियत समझ में आती है तब तक बहुत देर हो गई होती है। दोनों की बेटी 22 साल के बाद राज को मिलती है और बताती है कि वह उनकी बेटी है। राज हैरान रह जाता है, वह बेटी के सामने पत्नी से मिलने की इच्छा जताता है तो वो बेटी बताती है कि मां अब इस दुनिया में नहीं है। राज जब यह सच सुनता है तो टूट जाता है।
पिता के मुख से एक विलाप के साथ कुछ शब्द निकलते हैं। नाटक में रिश्तों और प्रेम की अहमियत को दिखाया है। नाटक के अंत में पुत्री अपने पिता को पापा कहकर पुकारती हैं और मंच पर पर्दा गिर जाता है। नाटक का लेखन एवं निर्देशन सुनील राज ने किया है। नाटक में भूमिका, सुनील ने दमदार अभिनय किया। संस्था के अध्यक्ष रजित सिंह कंवर ने बताया कि भाषा एवं संस्कृति विभाग और ऑल इंडिया थियेटर काउंसिल के संयुक्त तत्वावधान में यह उत्सव तीन दिनों तक चलेगा। वहीं पतझड़ के बाद नाटक में दो ऐसे बुजुर्गों की कहानी दिखाई है जो परिवार ने ठुकरा दिए हैं। दोनों वृद्ध आश्रम में रहते हैं और एक-दूसरे का सुख दुख बांटते हैं। इसमें भी रिश्तों का खोखलपन दिखाया है। इसका लेखन एवं निर्देशन सुरेंद्र सागर ने किया। नाटक में संगीता पांडे और साक्षी राजपूत ने अभिनय किया।