हिमाचल के कई इलाकों में अवैध कटान के मामले सामने आ रहे हैं। नेताओं और रसूखदारों पर वन काटुओं को संरक्षण के आरोप लग रहे हैं। सरकारी अमला जंगल बचाने के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये फूंक रहा है। लेकिन पर्यावरण संरक्षण की सही मायने में सीख सिरमौर जिले के नयन सिंह दे रहे हैं।
उन्होंने अपनी उपजाऊ जमीन पर देवदार के दस हजार पेड़ तैयार कर दिए हैं। वर्ष 1958 में पंजाब यूनिवर्सिटी से स्नातक करने के बाद उन्होंने खेतीबाड़ी को अपना पेशा बनाया। एक-एक पेड़ लगाते रहे, मुहिम से अपने पूरे परिवार को जोड़ा। पिछले 60 वर्षों में उन्होंने एक भी पेड़ नहीं काटा। आज राजगढ़ की शिलांजी पंचायत के कनोग गांव के इस नयन की 560 बीघा मलकीयत भूमि पर 10 हजार से अधिक लहलहा रहे देवदार के पौधे मिसाल दे रहे हैं।
एशिया में पीच वैली के नाम से मशहूर राजगढ़ इलाके में आड़ू ही नहीं, खुमानी, सेब, प्लम और बादाम के लिए भी जलवायु अनुकूल है। नकदी फसलें उगाकर अपनी आर्थिकी बढ़ाने के बजाय उन्होंने देवदार का जंगल उगाने को तरजीह दी। नयन सिंह दो बार पंचायत प्रधान रहे। इस दौरान भी पर्यावरण बचाने के लिए उन्होंने पंचायत के विभिन्न क्षेत्रों में 100 से अधिक जल संग्रहण टैंक बनवाए और लोगों को जागरूक करते रहे।