दिन के समय कम रोशनी से सीढि़यों में रहता है अंधेरा, लोगों के गिरने का खतरा, नलों के आस-पास लगी टाइलों में जमा है मैल
विज्ञापन
दुकानों के आगे रखे सामान से यात्रियों का चलना मुश्किल अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला के अंतरराज्यीय बस अड्डे आईएसबीटी (इंटर स्टेट बस टर्मिनल) में अंतरराज्यीय स्तर की सुविधाओं का अभाव है। इस बस अड्डे में रोजाना करीब 380 बसों की आवाजाही होती है। इसमें 90 बसें बाहरी राज्यों और शेष हिमाचल पथ परिवहन निगम तथा निजी बसें शामिल हैं। इन बसों में बाहरी राज्यों के पर्यटक और प्रदेश के लोग सफर करते हैं। इन हजारों लोगों के लिए यहां सुविधा कम, समस्याएं अधिक हैं।
आईएसबीटी बस अड्डे में जगह-जगह दुकानों के आगे डस्टबिन जरूर रखे हैं, लेकिन इनमें से कूड़ा, चाय के कप और प्लेटें बाहर बिखरी रहती हैं। धरातल मंजिल में खाने की पीने की दुकानों में जहां यात्री जलपान करते हैं, वहां मनमर्जी से रास्तों में ही दुकानों का सामान बेरोकटोक रखा जाता है। इससे लोगों को आवाजाही करने में दिक्कत होती है। राजधानी के इस बस टर्मिनल की दीवारें और छत वाहनों के धुएं से काली पड़ गईं हैं। खिड़कियों और दरवाजों के शीशों पर इतना मैल और धुआं जमा है, मानों इन्हें सालों से साफ नहीं किया है। यही नहीं बस अड्डे की सीढि़यों में रात के समय भले ही लाइटें जलती हों लेकिन दिन के समय लाइटें बंद होने पर अंधेरा रहता है। इससे लोगों के गिरने का खतरा है।
विज्ञापन
आईएसबीटी के बसों के पहुंचने और खड़ी होने वाली जगह पर सफाई कर्मी पूरा दिन सफाई करते हैं, बावजूद इसके वहां शौच की दुर्गंध रहती है। अड्डे के दोनों फ्लोर में बने शौचालयों में पानी और सफाई कर्मी हैं, लेकिन उस स्तर की सफाई व्यवस्था नजर नहीं आती। शौचालयों के बाहर हाथ धोने और पानी भरने के लिए लगे नलकों के आसपास लगाईं टाइलों पर भी मैल जमा हुआ है।
अड्डे के अंदर सड़क किनारे अवैध पार्किंग
आईएसबीटी के अंदर से जा रही डबल लेन सड़क के किनारे निजी वाहन पार्क हो रहे हैं। यहीं पर लालपानी, पंथाघाटी और पुराने बस अड्डे की ओर जाने वाली बसों के लिए बस ठहराव भी है। इन वाहनों के पार्क होने से यात्रियों के साथ ही बसों का इंतजार करने वाले लोगों को परेशानी होती है। इन वाहनों से कभी कोई सड़क पार करते हुए हादसे का शिकार हो सकता है।
नियमित रूप से की जाती है बस अड्डे की सफाई
आईएसबीटी परिसर में नियमित रूप से पांच कर्मचारी सफाई का कार्य करते हैं, अतिरक्त सफाई कर्मी भी रखे जा रहे हैं। दिन में दो से तीन बार कूड़ा नगर निगम के वाहन लेकर जाते हैं। यहां लोगों की आवाजाही अधिक होने से कूड़ा अधिक जमा हो जाता है। अड्डे की छतों, दीवारों पर डेढ़ साल बाद रंग रोगन किया जाता है, शीशों की भी सफाई की जाती है। बस अड्डे पर आने वाहनों से निकलने वाले धुएं से दीवारें काली पड़ जाती हैं। अड्डे में दुकानें चला रहे दुकानदारों को तय स्थान से बाहर अतिक्रमण काे हटाने का सिक्योरिटी स्टाफ समय-समय पर कार्य करता है। -अशोक शर्मा, बस अड्डा ऑपरेशन हेड