न्यायमूर्ति संदीप शर्मा की अदालत ने कहा कि यह याचिका दूरस्थ शिक्षा संस्थान और एचपीयूडीईए के चार शिक्षकों डॉ. पान सिंह, डॉ. सुनीता और डॉ. मंजू पुरी (हिंदी), और डॉ. सपना चंदेल (संस्कृत) के पीजी सेंटर में तबादले और उनकी स्थिति से संबंधित है। सुनवाई के रजिस्ट्रार की ओर से 12 दिसंबर के प्रस्तुत निर्देशों से अवगत कराया गया, जिसमें बताया गया कि इन शिक्षकों को उनके पदों सहित पीजी केंद्र में स्थानांतरित किया गया था, लेकिन वे अभी भी आइसीईडीओएल और एचपीयूडीईए के कर्मचारी बने हुए हैं और विश्वविद्यालय में उनका विलय नहीं हुआ है।
अदालत को बताया गया कि मामले से संबंधित पहले भी एक समिति का गठन किया गया था, जिसने याचिका लंबित होने के कारण आगे बढ़ने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने बार-बार कुलपति को इन व्यक्तियों को विश्वविद्यालय में बनाए रखने पर निर्णय लेने के लिए कहा था, लेकिन कुलपति किसी न किसी बहाने निर्णय लेने से कतरा रहे हैं। कोर्ट ने कुलपति को समय-समय पर पारित सभी आदेशों पर ध्यान देते हुए 10 मार्च 2026 तक अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो हाईकोर्ट याचिका का निर्णय अपने स्तर पर करेगा। यह याचिका भवानी और अन्य शिक्षकों की ओर से दायर की गई है।