इन पर बेटी के नाम की पट्टिका होगी। पौधों के वितरण व पौधरोपण का वन विभाग रिकॉर्ड तैयार करेगा। जिस जगह पौधे लगाए जाएंगे, उसका जीपीएस कोआर्डिनेट रखा जाएगा। समय-समय पर इन स्थानों की चेकिंग की जाएगी।
35.33 करोड़ से पांच साल के लिए तैयार की गई इस योजना में निजी भूमि में पेड़ों को काटने के लिए एचपी लैंड प्रेजरवेशन एक्ट के तहत मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। सामान्य पौधों के 17 साल के होने से पहले इन्हें काटा नहीं जा सकेगा।
बांस प्रजाति के पौधे चार साल बाद काटे जा सकेंगे। वन क्षेत्र या स्मृति वाटिका में लगे पौधे नहीं काटे जा सकेंगे। इन पौधों में लगने वाले फल, फूल, पत्तियों को बिना पेड़ को नुकसान पहुंचाए इस्तेमाल उस पौधे को लगाने वाले बेटी के परिवार कर सकेंगे।
प्रदेश में इस साल 34 हजार 500 बेटियों ने जन्म लिया है। अगले पांच साल में 1.91 लाख बेटियों के जन्म लेने का अनुमान है। ऐसे में योजना लागू होने के पहले साल 1 लाख 87 हजार 500 और पांच साल में 11.50 लाख पौधे बांटे जाएंगे।
पौधा रोपने को बेटी के मां-बाप चाहें तो पौधे की च्वाइस बता सकेंगे। राम सुभग सिंह ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में फारेस्ट कवर 28.60 प्रतिशत है, जो योजना शुरू होने के बाद हर साल बढ़ना तय है।