आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। जिस घर में अफीम व चरस मिली थी, वह घर ऊषा के नाम पर है। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। लंबी सुनवाई के बाद न्यायाधीश ज्योत्सना डढवाल की अदालत ने पति-पत्नी को 20-20 साल के कारावास की सजा सुनाई।
प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी में यह अब तक की यह सबसे बड़ी सजा है। इसी मामले में तीन अन्य दोषियों अमन, विपिन और मेहर सिंह को भी दोषी मानते हुए सजा सुनाई। चूंकि, पुलिस ने तस्कर की काली कमाई और उस कमाई से अर्जित संपत्तियों की न तो जांच की और न कोई कार्रवाई की।
इसलिए अब ईडी ने तस्कर दंपती की जांच शुरू कर दी है। यह कवायद ईडी ने इसलिए की है, ताकि वह यह जान सके कि तस्कर दंपती के पास कितनी संपत्ति है और वह किस तरह खरीदी गई है। इसके बाद ईडी अवैध रूप से अर्जित आय और उससे बनाई संपत्ति को ईडी प्रीवेंशन आफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत अटैचमेंट की कार्रवाई शुरू करेगी।