हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग।
- फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग को भंग किए हुए दो दिन बीत चुके हैं लेकिन कर्मचारी दूसरे दिन वीरवार को भी कार्यालय पहुंच गए। यहां तैनात सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें आयोग में प्रवेश की अनुमति नहीं दी। दिनभर आयोग परिसर में दिन बिताने के बाद सभी कर्मचारी शाम को अपने-अपने घरों को लौट गए। कर्मचारियों का कहना है कि पेपर लीक मामले में सभी कर्मचारियों को सजा देना कहां का न्याय है। जो लोग दोषी हैं, सरकार को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। आयोग को बंद करना किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। सरकार को भर्ती परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता लाने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए। साथ ही जिन कर्मचारियों ने ईमानदारी और निष्ठा के साथ आयोग में सेवाएं दी हैं, उन्हें न्याय मिलना चाहिए। क्योंकि किसी एक कर्मचारी की गलती की सजा सभी कर्मचारियों को नहीं मिलनी चाहिए। आयोग को भंग करने पर विजिलेंस ने आयोग के पूर्व ओएसडी एवं एडीसी और आयोग के पूर्व एचओडी एवं उपायुक्त हमीरपुर से मुलाकात कर पेपर लीक मामले में जांच के लिए जरूरी दस्तावेजों के बारे में बातचीत की।
इस पर एसडीसी हमीरपुर जितेंद्र सांजटा ने कहा कि उन्होंने प्रदेश सरकार को चिट्ठी लिखकर आयोग मामले में नोडल अधिकारी नियुक्ति करने की मांग की है ताकि विजिलेंस को समय-समय पर जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करवाए जा सकें। इसके साथ ही सरकार से आयोग के कर्मचारियों को फरवरी के वेतन की अदायगी के संदर्भ में भी लिखा गया है ताकि इन कर्मचारियों को वेतन के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े। आयोग को भंग करने से कर्मचारियों को वेतन की समस्या पेश आ सकती है। क्योंकि आयोग को भंग करने से आहरण एवं वितरण अधिकारी की शक्तियां फिर से भंग हो चुकी हैं। उधर, वीरवार को भी जेओए आईटी पेपर लीक मामले में विजिलेंस ने कुछ अभ्यर्थियों से पूछताछ की है। विजिलेंस ने बीते सोमवार को 626 पन्नों की चार्जशीट समेत हमीरपुर न्यायालय में चालान पेश किया है। इस मामले में न्यायालय में अब आगामी सुनवाई होनी है।