राज्य सरकार ने सीआरपीसी के तहत सभी आरोपियों पर सार्वजनिक जुआ अधिनियम के साथ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 29 जोड़ने की मांग की थी। अभियोजन पक्ष का कहना था कि सभी आरोपी जुआ खेल रहे थे और एक आरोपी के पास से नशीली गोलियां बरामद हुई थीं। इसलिए सभी को सह-अपराधी माना जाए। अदालत ने मामले की जांच रिपोर्ट, गवाहों के बयान और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि 155 ट्रामाडोल युक्त कैप्सूल आरोपी तारा चंद की व्यक्तिगत तलाशी से बरामद हुए थे। रणदीप, गोपी चंद और सुरजन के पास न तो नशीला पदार्थ मिला और न ही जांच में यह सामने आया कि उन्हें इसकी जानकारी थी।