बागी पार्षदों ने ईमेल के जरिये कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजी शिकायत, हस्तक्षेप करने की मांग रोस्टर के अनुसार महिला के लिए मांगा मेयर का पद
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में नगर निगम महापौर और कांग्रेस पार्षदों के बीच चल रहा विवाद अब दिल्ली पहुंच गया है। बागी पार्षदों ने इस मामले की शिकायत कांग्रेस हाईकमान को भी भेज दी है।
पार्टी हाईकमान से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। सूत्रों के अनुसार पार्षदों ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को ईमेल के जरिये अपनी शिकायत भेजी है। इसमें पार्षदों ने मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यकाल बढ़ाए जाने पर आपत्ति जताई है। इनका कहना है कि रोस्टर के अनुसार शिमला नगर निगम में मेयर और डिप्टी मेयर पद पर दूसरे पार्षदों को मौका मिलना चाहिए था। रोस्टर के अनुसार अब महिला पार्षद को मेयर पद पर तैनाती मिलनी थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इन पार्षदों का कहना है कि वह पार्टी के खिलाफ नहीं हैं और प्रदेश में चल रही कांग्रेस सरकार का भी पूरा सहयोग दे रहे हैं। उन्होंने ऐसी कोई गतिविधि भी नहीं की है जिससे पार्टी की छवि खराब हुई हो। हालांकि अभी तक इनके ईमेल का जवाब नहीं आया है। ऐसे में अब यह पार्षद हाईकोर्ट में चल रहे केस की सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं।
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कांग्रेस के इन नाराज पार्षदों ने इससे पहले शहरी विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री के समक्ष भी अपनी बात रखी है। सभी नाराज पार्षद एक सुर में कह रहे हैं कि नगर निगम में बदलाव होना चाहिए। कुछेक पार्षद कार्यकाल बढ़ाए जाने के फैसले से पहले उनसे बात तक न करने को लेकर भी नाराज हैं।
दोनों खेमों में चल रही जोड़ तोड़ की कोशिशें
नगर निगम में इस समय कांग्रेस के 24 पार्षद हैं। यह अब दो गुटों में बंटे हैं। एक गुट महापौर, उपमहापौर के साथ हैं। इनकी संख्या आठ से दस के बीच है। वहीं दूसरा गुट नाराज पार्षदों का है जिनकी संख्या 13 से 15 के बीच है। दोनों गुट एक दूसरे के पार्षदों को साथ मिलाने की भी पूरी कोशिशें कर रहे हैं। कुछ दिन से बागी गुट से कुछ पार्षद मेयर गुट के साथ देखे गए हैं। महापौर भी नाराज पार्षदों से बात कर उनकी नाराजगी दूर कर रहे हैं। इनके वार्डाें में काम भी तेज किए जा रहे हैं। हालांकि, नाराज पार्षद अपनी जिद पर अड़े हैं और लगातार मेयर की बैठकों और कार्यक्रमों का बहिष्कार कर रहे हैं।