समिति के अध्यक्ष व राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी
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हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती को लेकर प्रदेश सरकार विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की राय लेगी। जिन राज्यों ने भांग की खेती को लेकर नीति बनाई है, उनका भी प्रदेश सरकार अध्ययन करेगी। हिमाचल के ज्यादातर छह जिलों में भांग की खेती होती है। इसमें चंबा, कुल्लू, लाहौल स्पीति, किन्नौर, मंडी और जिला शिमला के ऊंचाई वाले क्षेत्र शामिल हैं। सरकार की ओर से गठित पांच सदस्यीय समिति बैठक कर क्षेत्रों का दौरा करेगी। एक माह में समिति सरकार को अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी। प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर ही प्रदेश सरकार अगला निर्णय लेगी।
एनडीपीएस एक्ट के तहत राज्यों को औषधीय उपयोग के लिए भांग की खेती को साधारण और विशेष आदेशों के तहत अनुमति देने की शक्तियां निहित की गई हैं। यह अनुमति केवल भांग के रेशे व इसके बीज या बागवानी और औषधीय उपयोग के लिए ही दी जा सकती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछेक जिलों में भांग की खेती को वैध दर्जा दिया है। उत्तराखंड में भी औद्योगिक उपयोग के लिए भांग की खेती की जा रही है। सरकार इस बारे में अंतिम निर्णय लेने से पूर्व नियामक उपायों सहित सभी पहलुओं पर विस्तृत तौर पर गहन विचार करेगी और जिन राज्यों ने इसे कानूनी वैधता प्रदान की है, उसका भी अध्ययन किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में भी भांग की नियंत्रित खेती की जाती है। कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम और चेक गणराज्य सहित यूरोपीय यूनियन के कुछ देशों में भी भांग की नियंत्रित खेती की अनुमति दी गई है। समिति के अध्यक्ष व राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि भांग की खेती के लिए ठोस नीति पर विचार करने से पहले विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की राय ली जाएगी। जिन राज्यों में खेती को बहाल किया गया है, उस पॉलिसी को भी देखा जाना है। जल्द ही समिति की बैठक होगी।