विश्व विख्यात रिवालसर झील के पानी का रंग कुछ माह से गहरा भूरा होने का कारण साफ हो गया है। झील की सतह में अधिक गाद इकट्ठा हो गई है। जब मछलियां इसे कुरेदती हैं तो यह झील में फैल जाती है। इससे झील के पानी का रंग गंदला और भूरा हो रहा है। ऐसे में गाद भविष्य में झील को बर्बाद कर सकती है। इससे मछलियों की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, पानी में ऑक्सीजन की मात्रा पर्याप्त है। इस बात की पुष्टि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी की है।
इस झील की देखभाल कर रही संस्था डेवलपमेंट एक्शन ग्रुप के कार्यकर्ताओं को झील परिसर में तैनात कर मछलियों के खाद्यान्न पर पाबंदी भी लगाई है। इसके बावजूद झील के पानी का रंग मटमैला होने से चिंता बनी हुई है। इस बारे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिशासी अभियंता अतुल ने बताया कि झील में पानी के सैंपल लेने के बाद यह बात साबित हो गई है कि पानी ठीक है। इसमें ऑक्सीजन की मात्रा भी सही है, मगर इसमें जमी गाद ही खतरनाक है।
प्रदेश सरकार जल्द उठाए कदम
व्यापार मंडल के प्रधान डेवलपमेंट एक्शन ग्रुप के अध्यक्ष नरेश शर्मा ने झील को बचाने के लिए जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि शीघ्र झील को न बचाया गया तो इसका अस्तित्व खत्म हो जाएगा। नगर पंचायत अध्यक्ष सुलोचना देवी, उपाध्यक्ष कमल गुप्ता, पार्षद लाभ सिंह ठाकुर, कश्मीर सिंह ने संयुक्त बयान में बताया कि कुछ समय से झील का पानी पूरी तरह मटमैला होने से मछलियों पर खतरा मंडरा चुका है। इससे पहले भी कई बार झील का रंग बदलने से टनों के हिसाब से मछलियां मारी जा चुकी हैं।