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Shimla News: जिले की फल मंडियों में घटा गुठलीदार फलों का कारोबार

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मौसम की बेरुखी से उत्पादन में गिरावट
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बीते साल के मुकाबले 1.32 लाख कम पहुंचे प्लम के बॉक्स
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले में स्टोन फ्रूट (गुठलीदार फलों) का सीजन समाप्त हो गया है। बीते साल के मुकाबले इस वर्ष जिले में प्लम, आड़ू और बादाम के उत्पादन में गिरावट आई है।

शिमला के भट्ठाकुफर और पराला मंडी में स्टोन फ्रूट का कारोबार होता है। बागवानों के अनुसार कम उत्पादन होने का सबसे बड़ा कारण मौसम की बेरुखी रही। कुमारसैन के बागवान अर्जुन नेगी और प्रदीप शर्मा ने बताया कि सूखे की वजह से फल का आकार नहीं बन पाया। इस वजह से उत्पाद घसा। एपीएमसी के आंकड़ों के अनुसार जिले की मंडियों में बीते साल 7,78,330 बॉक्स प्लम के बिकने पहुंचे थे। इस वर्ष यह संख्या घटकर 6,45,847 बॉक्स तक पहुंच गई। इस साल 1.32 लाख बॉक्स कम बिकने पहुंचे।
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बीते साल आड़ू के 21,591 बॉक्स मंडियों में पहुंचे थे, इस साल केवल 18,459 बॉक्स ही पहुंचे। बीते साल 1,177 क्विंटल बादाम मंडियों में पहुंचे थे वहीं इस साल 878 क्विंटल बादाम ही मंडी में पहुंचा। फल मंडियों के आढ़तियों ने बताया कि मांग के अनुसार प्लम और आड़ू की कम खेप पहुंची है। इसके चलते बागवानों को इस बार फसल के बेहतर दाम मिले हैं।
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चैरी, खुमानी और शक्करपारे का उत्पादन बढ़ा
जिले में इस स्टोन फ्रूट सीजन में जहां प्लम, आड़ू और बादाम का उत्पादन घटा है वहीं चैरी, खुमानी तथा शक्करपारे के उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चैरी के इस बार मंडी में बीते साल के मुकाबले 4,62,171 बॉक्स ज्यादा पहुंचे हैं। यह तीन सालों का सर्वाधिक आंकड़ा है। खुमानी के 43,320 और शक्करपारे के 36,956 ज्यादा बॉक्स भट्ठाकुफर और पराला फल मंडी में पहुंचे हैं।

कोट
इस साल जिले में प्लम, आड़ू और बादाम के उत्पादन में कमी देखने को मिली है, लेकिन फिर भी बागवानों को फसल के बेहतर दाम मिले हैं।
-देवानंद वर्मा, चेयरमैन, एपीएमसी शिमला किन्नौर
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