नवबहार में प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डीएस मन्हास द्वारा बनाए गए मकान को तोड़ा जाएगा या नहीं,
इस पर 18 जून को नगर निगम आयुक्त अमरजीत सिंह की कोर्ट में फैसला सुनाया जाएगा।
कोर्ट ने अवैध निर्माण के इस मामले की सुनवाई पूरी कर ली है। मंगलवार को पूर्व डीजीपी को इस मामले पर आखिरी
बार अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। मंगलवार को आयुक्त कोर्ट में पेश हुए पूर्व डीजीपी के प्रतिनिधि ने कोई भी
नया तथ्य पेश नहीं किया।
कोर्ट से पुराने तथ्यों पर गौर कर फैसला देने की अपील की। पूर्व डीजीपी के भवन निर्माण का मामला बीते साल अक्तूबर से सुर्खियों में है। नगर निगम और जिला प्रशासन ने अपने-अपने स्तर पर मामले की जांच की है।
दोनों जांच रिपोर्ट के बनने के बाद नगर निगम आयुक्त की कोर्ट में मामला दर्ज हुआ है। इसको लेकर कई बार आयुक्त कोर्ट में सुनवाई हो चुकी है। पहली मार्च को हुई सुनवाई में पहली बार पूर्व डीजीपी स्वयं कोर्ट में हाजिर हुए थे।
पूर्व डीजीपी का बहुमंजिला भवन नवबहार के समीप है। 1989 में पहली बार मकान का निर्माण करने के लिए नगर निगम में ग्राउंड फ्लोर, फर्स्ट फ्लोर, ए सेकेंड फ्लोर और थर्ड फ्लोर का नक्शा स्वीकृत करने के लिए दिया गया था। आरोप है कि पूर्व डीजीपी ने स्वीकृत नक्शे के बाहर भवन का निर्माण किया है।
डीएस मन्हास ने अवैध निर्माण को गिराने के नगर निगम के आदेश को चुनौती देने के लिए प्रदेश उच्च न्यायालय में
याचिका दायर कर चुके हैं जिसे उन्होंने बाद में याचिका को वापिस लेने का आग्रह किया था।
विजिलेंस में भी मन्हास के खिलाफ अवैध निर्माण का मामला दर्ज है। मामले की जांच करते हुए विजिलेंस ने निगम की वास्तुकार एवं योजनाकार शाखा से मन्हास से संबंधित रिकॉर्ड भी जब्त किया है। बताया जा रहा है कि विजिलेंस स्वयं भी भवन की नपाई करवाएगा।