किन्नौर के रिकांगपिओ जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर उरनी ढांक नामक स्थान पर भारी भूस्खलन से सतलुज नदी में झील बन गई है।
इससे पहाड़ी पर बसे उरनी गांव और सेना की बैरकों को सबसे ज्यादा खतरा हो गया है। खतरे को भांपते हुए जिला प्रशासन ने टापरी, वांगतू, चौरा, नाथपा, रामपुर, दत्तनगर, नोगली, सुन्नी, तत्तापानी में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
लगातार हो रहे भूस्खलन से उरनी की पहाड़ी पर दरारें चौड़ी होती जा रही हैं। नेशनल हाइवे पांच पूरी तरह बंद है। बढ़ते खतरे को देखते हुए गाड़ियों की आवाजाही के लिए उरनी गांव से वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
शुरू किया झील को तोड़ने का काम
उधर, जिला प्रशासन ने झील को तोड़कर करीब 40 फीसदी पानी निकाल दिया है, लेकिन लगातार हो रहे भूस्खलन से पानी का बहाव रुक रहा है। इससे आसपास के गांवों के बहने का भी खतरा पैदा हो गया है।
वहीं, उरनी के पास कई दिन से हो रहे भूस्खलन की वजह से नेशनल हाईवे भी बंद पड़ा है। इस स्थान पर लगातार भूस्खलन हो रहा है।
जिला प्रशासन ने जेपी कंपनी को जल्द से जल्द कड़छम डैम के दरवाजे खोलने के निर्देश दे दिए हैं ताकि झील में जमा हुई मिट्टी बह सके।
इलाका छोड़ रहे लोग
वहीं, इस नई आफत के बाद सतलुज के आसपास के लोग इलाका छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। यदि जल्द ही झील को तोड़कर पानी बाहर नहीं निकाला गया तो इससे आसपास के कई गांव तबाह हो सकते हैं।
गौरतलब है कि हिमाचल में इससे पहले भी पारछू झील के चलते बाढ़ का खतरा पैदा हो गया था। उधर, सरकार ने इस नए खतरे से निपटने के लिए तैयारी शुरू कर दी है।
लोगों ने भी सरकार से मांग की है कि समय रहते कोई ठोस कदम उठाया जाए।