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Bilaspur News: गोबिंद सागर झील में जल समाधि लेने लगे मंदिर, जानें पूरा मामला

Wed, 19 Jul 2023 10:30 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर

सार

अनदेखी के अभाव में एक बार फिर इस बरसात में भी गोबिंद सागर झील में इस साल फिर से कहलूर रियासत का इतिहास जल समाधि लेने जा रहा है।
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गोबिंद सागर झील में जल समाधि लेने लगे मंदिर। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में सरकारों की नाकामी कहें या अनदेखी, दशकों से पानी में समाधि लेने वाले कहलूर रियासत के इतिहास को बचाने के लिए कवायद शुरू तो हुई लेकिन इसे सिरे चढ़ाने के लिए कोई बड़ी कोशिश दिखाई नहीं दे रही है। अनदेखी के अभाव में एक बार फिर इस बरसात में भी गोबिंद सागर झील में इस साल फिर से कहलूर रियासत का इतिहास जल समाधि लेने जा रहा है। छठी से 17वीं सदी के बीच बने 28 मंदिरों में से 21 सतलुज पर भाखड़ा बांध बनने के बाद गोबिंद सागर में गायब हो गए थे, लेकिन आठ मंदिर अब तक अपना वजूद जैसे-तैसे बचाए हुए हैं। लेकिन हर साल पानी में छह माह तक रहने के बाद यह इतिहास खुद को जिंदा रखने के लिए कितना संघर्ष कर पाएगा, यह भविष्य के गर्भ में है।

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इस साल भारी बारिश होने के कारण यह मंदिर जल्द समाधि लेने जा रहे हैं। झील में पानी भरने लगा है और मंदिरों का एक हिस्सा इसमें समा गया है। सर्दियों से बरसात शुरू होने तक राष्ट्रीय राजमार्ग 21 पर चंडीगढ़ से मनाली तक ड्राइव करने पर बिलासपुर के पास घाटी के नीचे गोबिंद सागर के बीच में शिखर शैली में पत्थर से बनी छतों का शानदार दृश्य दिखाई देता है। जब गर्मियों में पानी का स्तर कम हो जाता है, तो इमारत पूरी तरह से रेतीली झील के तल पर खड़ी हो जाती है, जिससे राहगीरों को उनकी सुंदरता और भव्यता से मंत्रमुग्ध करती है। लेकिन बरसात जब चरम पर होती है तो यह यह मंदिर छह माह के लिए पानी में डूब जाते हैं।

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पूर्व सरकार में मंदिर शिफ्ट करने की योजना नहीं चढ़ी सिरे
पूर्व भाजपा सरकार ने इन मंदिरों के संरक्षण और स्थानांतरण के लिए 1500 करोड़ रुपये की परियोजना की घोषणा की थी। इसमें से 1400 करोड़ केंद्र सरकार और 100 करोड़ प्रदेश सरकार ने देना था। 2022 में इस परियोजना के लिए मिट्टी के सैंपल लिए गए। इसका ब्लू प्रिंट भी तैयार हुआ। पर्यटन विभाग को उम्मीद थी कि जल्द ही इसके लिए बजट भी जारी होगा। लेकिन सरकार बदलने के बाद इसकी गति पर रोक ही लग गई है।

यह थी योजना
हिमाचल प्रदेश सड़क और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड ने अध्ययन किया है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) सलाहकार के रूप में निर्माण कंपनी लार्सन एंड टूर्बो को नियुक्त किया गया है। पहले चरण में 105 करोड़ रुपये की लागत से नाले के नौण में टापू बनाकर रंगनाथ, खनेश्वर और नारदेश्वर के तीन मुख्य मंदिरों को लिफ्ट किया जाना था। दूसरे चरण में नाले का नौण, लुहणू घाट, ऋषिकेश घाट और मंडी भराड़ी में चार नाव घाट, वॉकवे, संपर्क सड़कें, पार्किंग क्षेत्र, पानी, बिजली की सुविधाएं दी जानी थीं। मंदिरों के जीर्णोद्धार के अलावा, नए पर्यटक आकर्षणों का निर्माण करना था। तीसरे चरण या मॉड्यूल सी में, मंडी भराड़ी में झील के किनारों को जोड़ने वाला एक बैराज बनाने की योजना थी। इस बैराज में वाटर स्पोर्ट्स की सभी गतिविधियां करवाने का प्रस्ताव था।
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पर्यटन विभाग ने फंडिंग के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक को फाइल भेजी है। लेकिन अभी तक इसके लिए मंजूरी नहीं मिली है।- आबिद हुसैन सादिक,उपायुक्त बिलासपुर
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