पूर्व सरकार में मंदिर शिफ्ट करने की योजना नहीं चढ़ी सिरे
पूर्व भाजपा सरकार ने इन मंदिरों के संरक्षण और स्थानांतरण के लिए 1500 करोड़ रुपये की परियोजना की घोषणा की थी। इसमें से 1400 करोड़ केंद्र सरकार और 100 करोड़ प्रदेश सरकार ने देना था। 2022 में इस परियोजना के लिए मिट्टी के सैंपल लिए गए। इसका ब्लू प्रिंट भी तैयार हुआ। पर्यटन विभाग को उम्मीद थी कि जल्द ही इसके लिए बजट भी जारी होगा। लेकिन सरकार बदलने के बाद इसकी गति पर रोक ही लग गई है।
यह थी योजना
हिमाचल प्रदेश सड़क और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड ने अध्ययन किया है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) सलाहकार के रूप में निर्माण कंपनी लार्सन एंड टूर्बो को नियुक्त किया गया है। पहले चरण में 105 करोड़ रुपये की लागत से नाले के नौण में टापू बनाकर रंगनाथ, खनेश्वर और नारदेश्वर के तीन मुख्य मंदिरों को लिफ्ट किया जाना था। दूसरे चरण में नाले का नौण, लुहणू घाट, ऋषिकेश घाट और मंडी भराड़ी में चार नाव घाट, वॉकवे, संपर्क सड़कें, पार्किंग क्षेत्र, पानी, बिजली की सुविधाएं दी जानी थीं। मंदिरों के जीर्णोद्धार के अलावा, नए पर्यटक आकर्षणों का निर्माण करना था। तीसरे चरण या मॉड्यूल सी में, मंडी भराड़ी में झील के किनारों को जोड़ने वाला एक बैराज बनाने की योजना थी। इस बैराज में वाटर स्पोर्ट्स की सभी गतिविधियां करवाने का प्रस्ताव था।
पर्यटन विभाग ने फंडिंग के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक को फाइल भेजी है। लेकिन अभी तक इसके लिए मंजूरी नहीं मिली है।- आबिद हुसैन सादिक,उपायुक्त बिलासपुर