कंपनी प्रबंधन के बाद अब सीआईडी ने आंतरिक ऑडिट करने वाले ऑडिटरों को भी अपनी जांच की जद में ले लिया है। सीआईडी की अब तक की जांच में कंपनी की ओर से किए गए 43 सौ करोड़ से ज्यादा के घोटाले में ऑडिटरों की भी भूमिका मिली है।
इसके बाद जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए सीआईडी ने अब केंद्रीय कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय को पत्र लिखकर ऑडिटरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सिफारिश की है। साथ ही चार्टर्ड अकाउंटेंटों की गवर्निंग बाडी इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (आईसीएआई) को भी कंपनी से जुड़े सभी ऑडिटरों को ब्लैकलिस्ट करने को कहा है।
जांच एजेंसी का मानना है कि अगर आडिटर सही ऑडिट करते तो बैंकों को बैलेंस शीट और ऑडिट रिपोर्ट से कंपनी के खेल का पता चल जाता। इससे बैंकों को फर्जी लेन देन के दस्तावेज दिखाकर 21 करोड़ का लोन लेना कंपनी के लिए आसान नहीं रहता। जांच एजेंसी जहां एक ओर आडिटरों के कामकाज से कंपनी को हुए खेल की विस्तृत जांच भी कर रही है, वहीं उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की भी कवायद शुरू कर दी है।
विशेष ऑडिट के लिए आबकारी विभाग से साधा संपर्क
जांच एजेंसी ने इसके साथ ही राज्य कर विभाग को भी पत्र लिखकर विशेष ऑडिट कराने को कहा है। इसके लिए एजी ऑफिस से अधिकृत ऑडिटरों को ही लगाने की बात कही गई है। प्रधान महालेखाकार को पत्र लिखकर ऑडिट के लिए जल्द समय देने को कहा गया है।