हिमाचल के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खाली करीब ढाई हजार पदों को स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) से भरने की तैयारी है। सरकार जल्द ही पीजीटी, टीजीटी और सीएंडवी के खाली पदों को भरेगी। शिक्षकों को पीरियड आधार पर नियुक्ति दी जाएगी। सरकार दो साल से खाली पदों पर ही भर्ती की शर्त को वापस ले रही है।
अभी नए अपग्रेड और दो साल से खाली पदों पर ही एसएमसी से भर्ती हो रही थी। प्रदेश भर में इस तर्ज पर अब तक करीब डेढ़ हजार शिक्षकों के पद भरे जा चुके हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में पीजीटी, सीएचटी, एचटी, जेबीटी के 2968 पद भरने की घोषणा की थी। लेकिन पांच महीने बाद भी भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।
जिन स्कूलों में ज्यादा बच्चे, वहां भी होगी भर्ती
इसके अलावा गैर शिक्षकों के 8494 पदों पर भी भर्ती होनी है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग में करीब तीन हजार पद खाली हैं। इसमें सर्वाधिक खाली पद पीजीटी के हैं। पीजीटी के 14008 पद स्वीकृत हैं लेकिन इसमें 1610 पद खाली हैं। सीएचटी के 2097 में से 158 पद, एचटी के 3289 में से 30 और जेबीटी के 21778 में से 899 पद खाली हैं।
उधर, उच्च शिक्षा निदेशक दिनकर बुराथोकी ने बताया कि सिर्फ पद भरने के लिए भर्ती नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि सबसे पहले उन स्कूलों में एसएमसी से शिक्षक भर्ती किए जाएंगे, जहां बच्चों की संख्या ज्यादा है।
सशर्त अनुबंध में लाए जाएं पीटीए शिक्षक
उधर, प्रदेश पीटीए शिक्षक संघर्ष मंच ने प्रदेश सरकार से अनुबंध से वंचित पीटीए अध्यापकों को जल्द सशर्त अनुबंध में लाने की मांग की है। मंच ने नियमितीकरण की प्रक्रिया को जल्द शुरू करने का भी आग्रह किया है।
मंच के प्रदेशाध्यक्ष पंकज कुमार, राज्य उपाध्यक्ष दिनेश पटियाल, महासचिव राजपूत संजीव ठाकुर, मुख्य सलाहकार नरेंद्र शर्मा, ने सरकार की ओर से दिहाड़ीदारों को 7 साल में नियमित करने के निर्णय का स्वागत किया है।
वहीं 10 वर्ष की सेवाओं के बाद भी पीटीए अध्यापकों को अनुबंध से भी वंचित होने पर हैरानी जताई है। मंच ने सरकार से मांग की है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे तदर्थ अध्यापक कर्मचारियों का तदर्थ कार्यकाल में ही यदि आकस्मिक निधन हो जाता है तो सरकार की तरफ से उनके परिवारों को भी आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाए।