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सरकार से नाराज हुए शिक्षक, ये रही 35 मांगें

Thu, 17 Dec 2015 11:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को पेश आ रही समस्याओं और मांगों पर वीरवार को राजकीय अध्यापक संघ और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के बीच बैठक होगी। राज्य सरकार को घेरने के लिए शिक्षक संघ ने 35 सूत्रीय मांगपत्र तैयार किया है। वीरवार को प्रस्तावित बैठक हंगामेदार होने की संभावना है। राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष विरेंद्र चौहान ने बताया है कि शिक्षा निदेशक को मांगों से अवगत करवाया जाएगा।
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मांगे हल करने के लिए समय दिया जाएगा। इसके बाद भी अगर मांगे पूरी नहीं र्हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। संघ ने बैठक के लिए 35 सूत्रीय मांगपत्र तैयार किया है। राजकीय अध्यापक संघ ने एसएमसी भर्ती प्रक्रिया का विरोध किया है। कहा है कि यह भेदभावपूर्ण है। भविष्य में कानूनी बाधाएं खड़ी करने वाली प्रक्रियाएं इसी कारण जन्म ले रही है। इसके लिए नियमित पदों पर नियमित नियुक्तियां की जाएं।


राजकीय अध्यापक संघ ने अन्य मांगों में कहा है कि सभी वर्गों के अध्यापकों की वरिष्ठता सूची को अपडेट किया जाए। स्थाईकरण की प्रक्रिया निर्धारित अवधि में पूरी की जाए। सीएंडवी अध्यापकों की जिला कॉडर से बाहर तबादले के लिए न्यूनतम 13 वर्ष वर्तमान सेवाकाल को घटाकर पांच साल और एक प्रतिशत के कोटे को बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया जाए।
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जेबीटी, सीएंडवी से टीजीटी की पदोन्नति जल्द दी जाए। माध्यमिक और उच्च शिक्षा निदेशालय अलग-अलग किए जाएं। 2003 के बाद नियमित अध्यापकों को पेंशन के दायरे में लाया जाए। गृह विज्ञान, क्राफ्ट, योगा, संगीत अध्यापकों व प्रयोगशाला परिचरों को संशोधित ग्रेड पे का लाभ दिया जाए।

अनुबंध अध्यापकों की वार्षिक वेतन वृद्धि तीन प्रतिशत की दर से की जाए। अध्यापकों की सीधी भर्ती का कोटा पंजाब की तर्ज पर 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत किया जाए। खाली पड़े पदों को भरा जाए। अनुबंध शिक्षकों के नियमितीकरण को पांच वर्ष पूरे होने की तिथि से अमल में लाया जाए।
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