हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड प्रबंधन से साफ शब्दों में कह दिया है कि पेपर जांच के रेट नहीं बढ़े तो शिक्षक विरोध करेंगे। प्रदेश सरकार से मांग की है कि शिक्षा क्षेत्र के लिए बजट 25 फीसदी बजट रखा जाए ताकि प्रदेश में शिक्षा में और अधिक गुणात्मक सुधार आ सके।
शिक्षकों के साथ चर्चा के बाद राज्य में ठोस तबादला नीति बनाई जाए। इसके अलावा सरकार एसएससी और कंप्यूटर शिक्षकों के लिए भी स्थायी नीति बनाए ताकि इन शिक्षकों को रेगुलर किया जा सके। स्कूलों में प्रधानाचार्य के रिक्त पड़े 400 पदों को शीघ्र भरे। प्रदेश में शिक्षा के लिए 17 फीसदी बजट रखा था और यह बढ़ाया नहीं गया है।
सरकार इस साल शिक्षा के बजट को बढ़ाकर 25 फीसदी करे। दिल्ली मॉडल अपनाकर स्कूलों में धनराशि व्यय की जाए। प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास व्यवस्था की जाए। कई स्कूलों में स्मार्ट क्लासें तैयार कर दी हैं लेकिन इनको अभी तक स्तरोन्नत नहीं किया है। शिक्षकों की अनुबंध अवधि को तीन साल से घटाकर दो साल किया जाए।
चौहान ने कहा कि पेपर चेकिंग के रेट बढ़ाने के लिए शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष से समय मांगा था लेकिन उनको नहीं बुलाया गया। विश्वविद्यालय भी समय समय पर पेपर चेकिंग की दरें बढ़ाता है। बोर्ड ने यह दरें लंबे समय से नहीं बढ़ाई हैं।