रिज मैदान पर रविवार को शिमला और सोलन जिलों के एक बडे़ वर्ग के प्रमुख आराध्य देवता डोमेश्वर गुठाण का जातर देव नृत्य हुआ। देवता की यहां लोक रीति से पूजा की गई। डोमेश्वर देवता ने अपने गूर के माध्यम से इस जातर को करने वाले और इसमें भाग लेने वाले लोगों को आशीर्वाद दिया। डोमेश्वर देवता का मूल स्थान ठियोग तहसील के गुठाण गांव में है।
यह देवता पिछले कई महीनों से जातर यानी यात्रा पर निकले हुए हैं। जातर के बीच ठहराव और देवनृत्य का स्थान पहले से ही तय होता है। यह जातर हर बीस साल बाद होती है। शिमला शहर में भी जातर के लिए तय स्थान है। यह पहले रानी झांसी पार्क होता था। पार्क में इस तरह की गतिविधियां बंद होने के बाद इस बार सरकार ने इस पारंपरिक लोकनृत्य के लिए रिज पर इजाजत दी। रविवार को यह जातर देवनृत्य खूब धूमधाम से मनाया गया।
देव प्रतिमाओं से युक्त देवता के स्वर्ण जटित रथ को चार लोगों ने कंधे पर उठाया। इस रथ को ढोल, नगाड़ों, करनालों, शहनाई आदि देवधुनों पर एक खास लय में नचाया गया। रथ की परिक्रमा में देवलुओं ने भी पारंपरिक चोल्टू पोशाक पहनकर लोकनृत्य किया। करीब डेढ़ बजे शुरू हुआ यह देवनृत्य करीब साढे़ चार बजे तक चला।
इस परंपरा को निभाने में सहयोग करने वाले सभी शिमलावासियों को आशीर्वाद देने के बाद देवता डोमेश्वर टका बैंच के पीछे एक भवन के मैदान में रात्रि ठहराव पर रहे। देव कारदार मदन लाल वर्मा ने इस आयोजन के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज का आभार जताया। उन्होंने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश लिंगप्पा नारायण स्वामी, न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर के सहयोग के लिए आभार जताया।