राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने शिक्षकों को पर्यावरण संरक्षण, नशे की रोकथाम और भारतीयता का पाठ भी विद्यार्थियों को पढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं रोकने के लिए स्कूल स्तर से ही विद्यार्थियों को पर्यावरण मित्र बनाने काम काम होना चाहिए। पांगी में अभी भी कई लोग फंसे हुए हैं। सेना की मदद से सरकार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंच रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कड़ा रूख अपनाया है। नदियों में लकड़ियां बह रही हैं। पर्यावरण को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। राजभवन की ओर से भी प्रभावित परिवारों कों हेलिकाप्टर के माध्यम से राशन भेजा गया है। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक ज्ञान, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के ध्वजवाहक हैं। गुरु की प्रधानता परमात्मा से भी अधिक आंकी गई है।
राज्यपाल ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षण केवल पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का पवित्र दायित्व है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक ही सशक्त भारत की नींव हैं। शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि वर्तमान में 17,330 स्कूल संचालित हैं, जिनमें लगभग 14.25 लाख छात्र और 1.02 लाख शिक्षक कार्यरत हैं। कुछ श्रेणियों में शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन नहीं आने के कारण चयन नहीं हो सका। इस अवसर पर राज्यपाल ने एक स्मारिका का भी विमोचन किया। स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। समारोह में पोर्टमोर और टुटू स्कूल की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।