स्कूलों की प्रार्थना सभा में रोजाना नारी सम्मान की शपथ लेने के आदेशों पर शिक्षक संघ भड़क उठे हैं। शिक्षक संगठनों ने उच्च शिक्षा निदेशालय के आदेशों को शिक्षकों को बेइज्जत करने वाला बताया है। संगठनों ने महिला आयोग और शिक्षा निदेशालय के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए रोजाना शपथ लेने के आदेशों को तुगलकी फरमान बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की है।
राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा है कि शिक्षक सदियों से समाज को नई दिशा दे रहे हैं। आज उन्हें शपथ लेने के लिए मजबूर किया जाना गलत है। उन्होंने कहा कि महिला आयोग के ये आदेश जानबूझ कर उत्तेजित करने वाले हैं। महिला और पुरुष अध्यापकों के बीच इन आदेशों से हीन भावना आएगी।
वीरेंद्र चौहान ने कहा कि शिक्षकों के लिए बच्चा भगवान से कम नहीं होता है। शिक्षकों की भावना कभी गलत नहीं होती। मनोविकार वाले विशेष शिक्षकों में ही गलत भावना आती है। इनके कुकृत्यों के चलते पूरे शिक्षक वर्ग को अपमानित होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि रोजाना शपथ के आदेश पुरुषों को नीचा दिखाने वाले हैं। यह तुगलगी फरमान है। इन आदेशों से महिला आयोग की सोच में ही खोट नजर आ रहा है। इससे लिंग भेद की खाई डाली जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की शपथ का कोई औचित्य नहीं है। उच्च शिक्षा निदेशक ने भी इस संदर्भ में किसी से संघ से चर्चा ना कर फैसला लेकर गलत किया है। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षक नारियों का सम्मान करते हैं लेकिन रोजाना शपथ के आदेशों का पालन नहीं करेंगे।
उधर, प्रदेश स्नातकोत्तर अध्यापक संघ के अध्यक्ष चितरंजन काल्टा ने प्रार्थना सभा में शपथ लेने का विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि निदेशालय इस तरह के आदेश जारी कर शिक्षकों का मानसिक उत्पीड़न करने जा रहा है। विद्यालय में सभी शिक्षक एक समान हैं।
सभी विद्यार्थियों को समान रूप से देखा जाता है। ऐसे आदेश जारी करना समानता के अधिकार का हनन है। संघ के प्रेस सचिव मोहन शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनीष शर्मा, महासचिव देसराज कटवाल, उपाध्यक्ष कर्म चंद ठाकुर, विनोद बंसल सहित कई अन्य ने कहा है कि इस संदर्भ में कानूनी राय ली जा रही है। निदेशालय ने जल्द ही अगर आदेश वापस नहीं लिए तो कानूनी कार्रवाई करने से भी गुरेज नहीं किया जाएगा।