पानी, पार्किंग, सफाई और रोजगार का सपना दिखाकर नगर निगम शिमला पर पहली बार कब्जा जमाने वाली भाजपा आज अपने कार्यकाल के 100 दिन पूरा कर रही है। लेकिन अच्छे दिनों का शहरवासियों को अभी भी इंतजार है। पार्टी ने चुनाव के दौरान शहरवासियों को कई बड़े सपने दिखाए थे।
कहा था कि शहर में पेयजल संकट खत्म होगा, पानी के बिल- सीवरेज सैस कम होंगे और सफाई व्यवस्था भी ठीक होगी, लेकिन इन दौरान शहरवासियों को राहत कम परेशानी ज्यादा झेलनी पड़ी। इन सौ दिन में तीन बार सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, अगस्त तक फ्लैट बिल और बरसात के दो माह पेयजल संकट से शहरवासियों को जूझना पड़ा।
ऐसा नहीं कि निगम हर काम में फेल ही रही। इन्हीं सौ दिन के भीतर 52 एमएलडी पंपिंग का रिकॉर्ड बना। बरसात के बाद पेयजल संकट खत्म हुआ। पहली बार शहर में खतरनाक पेड़ों को हटाने की मुहिम शुरू हुई।
ये था भाजपा का संकल्प प्रपत्र, किए थे 10 वायदे
वायदा नंबर 1- लीकेज दूर कर खत्म करेंगे पेयजल संकट, कौल डैम और बावड़ियों का पानी लिफ्ट होगा।
क्या हुआ- पंपिंग में सुधार हुआ और शहर को पानी की सप्लाई भी बढ़ी। लेकिन बरसात के दौरान पेयजल संकट बरकरार रहा। कौल डैम प्रोजेक्ट अभी भी सुस्त चाल में है। बावड़ियों का पानी लिफ्ट करने का काम शुरू नहीं हो पाया।
वायदा नंबर 2- पानी के बिल कम किए जाएंगे, सीवरेज सैस को कम किया जाएगा
क्या हुआ- पानी के बिल भी कम नहीं हुए, न ही सीवरेट सैस घटा। नए मीटर लगाने का काम जुलाई में पूरा होना था वह अक्तूबर तक खिंच गया। मीटर रीडिंग पर अभी तक बिल जारी नहीं हो पाए। आगे भी कुछ दिन और परेशानी जारी रहेगी।
वायदा नंबर 3- शहर में 10 हजार गाड़ियों के लिए पार्किंग की सुविधा देंगे।
क्या हुआ- निगम ने विकासनगर समेत कई पार्किंग का काम शुरू करवा दिया। लेकिन ये पुराने ही प्रोेजेक्ट थे जो अब शुरू हुए। नई पार्किंग स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बननी हैं, जिसका ब्यौरा तैयार किया जा रहा है।
वायदा नंबर 4- फ्लाईओवर, एस्केलेटर लगाएंगे, सफाई व्यवस्था दुरुस्त होगी
क्या हुआ- फ्लाईओवर के लिए कोई प्रपोजल नहीं बना। 22 एस्केलेटर लगाने की योजना स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में हैं जिन पर 212 करोड़ खर्च होंगे। ये भी पहले का प्रोजेक्ट है। सितंबर में 20 दिन सफाई व्यवस्था ठप रही। लोग कूड़ खुद फेंकने को मजबूर हुए।
वायदा नंबर 5- व्यवसायिक केंद्र, जिम खोलेंगे, लावारिस पशुओं से निजात मिलेगी
क्या हुआ- अभी तक न ये केंद्र खुले, न ही किसी वार्ड में जिम खोलने की योजना सिरे चढ़ी। लावारिस पशुओं पर नई निगम भी कुछ नहीं कर पाई। शहर में कुत्तों, बंदरों का आतंक जारी है। रोजाना डॉग और मंकी बाइट के मामले सामने आ रहे हैं। इन्हें पकड़ने की योजना नहीं बनी।