रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर कैप्टन रमन कुमार शर्मा की ट्रांसफर को शिमला की बस ऑपरेटर और टैक्सी यूनियनों ने बदले की कार्रवाई करार दिया है। बस और टैक्सी ऑपरेटरों का कहना है कि आरटीओ ने एसआरटी (स्पेशल रोड टैक्स) जमा न करने वाले बस ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई की थी, जिसके बाद टैक्स डिफाल्टरों ने मुख्यमंत्री को गुमराह कर आरटीओ का ट्रांसफर करवा दिया।
बस ऑपरेटर यूनियन शिमला के अध्यक्ष कमल ठाकुर का कहना है कि बीते दिनों आरटीओ ने रोड टैक्स जमा न करने पर दो बसें जब्त की थीं। दोनों बसों का करीब 13 लाख रुपये टैक्स बकाया था। इन बस ऑपरेटरों ने मुख्यमंत्री को गुमराह कर आरटीओ की ट्रांसफर करवा दी।
उन्होंने बताया कि सभी बस ऑपरेटर तय समय पर अपना रोड टैक्स जमा करवा रहे हैं जबकि सरकार के नजदीकी कुछ बस ऑपरेटर टैक्स चुकाए बिना बसें चलाना चाहते हैं, यह सहन नहीं होगा।
उधर हिमालयन बस ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष विक्रम बरागटा का कहना है कि राजनीतिक पहुंच के चलते कुछ बस ऑपरेटरों ने आरटीओ शिमला का ट्रांसफर करवाया है। टैक्सी ऑपरेटर यूनियन ने भी आरटीओ शिमला के तबादले को गलत करार दिया है।
यूनियन के अध्यक्ष अशोक चौहान का कहना है कि टैक्स डिफाल्टर बस ऑपरेटरों के कहने पर सरकार ने आरटीओ शिमला का तबादला किया है, जो सही नहीं है।
टैक्सी ऑपरेटर यूनियन सरकार को ज्ञापन सौंपकर तबादला रद्द करने की मांग करेगी। मामले को लेकर जब कैप्टन रमन कुमार शर्मा से बात की गई तो उन्होंने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया।