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Shimla News: बिना टैक्सो दिए पंजाब में दौड़ाई टैक्सी, मुआवजे की मांग खारिज

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कीरतपुर के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी टैक्सी
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मरम्मत खर्च न मिलने पर कोर्ट में दायर की थी याचिका
रुचि सांख्यान
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने अपने फैसले में बीमा कंपनी के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि कोई वाहन बिना आवश्यक टैक्स चुकाए दूसरे राज्य की सीमा में चलाया जाता है और दुर्घटनाग्रस्त होता है तो यह बीमा पॉलिसी की शर्तों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

शिकायतकर्ता भीम सिंह निवासी सुन्नी ने आयोग के समक्ष एक शिकायत दर्ज की थी। उन्होंने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ अपनी टैक्सी के मरम्मत खर्च और मुआवजे की मांग की थी। शिकायतकर्ता का तर्क था कि उनकी टैक्सी का बीमा था और 6 मार्च 2024 को जब वाहन मनाली से चंडीगढ़ जा रहा था तो कीरतपुर के पास एक अन्य वाहन की टक्कर से उनकी टैक्सी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि वाहन दुर्घटना के समय पंजाब राज्य की सीमा में था लेकिन चालक ने वहां वाहन चलाने के लिए आवश्यक टैक्स नहीं चुकाया था।
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कंपनी के सर्वेयर की रिपोर्ट और साक्ष्यों से यह सिद्ध हुआ कि हिमाचल-पंजाब सीमा पर मौरा टैक्स कलेक्शन सेंटर मौजूद था लेकिन शिकायतकर्ता ने वहां टैक्स जमा नहीं करवाया था। आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि वाहन के पास नेशनल परमिट होने के बावजूद संबंधित राज्य (पंजाब) में प्रवेश के लिए टैक्स न चुकाना बुनियादी शर्तों का उल्लंघन है। आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के अमृत पाल सिंह बनाम टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बिना वैध परमिट या टैक्स के वाहन चलाना बीमा शर्तों का उल्लंघन है जिसके लिए बीमा कंपनी उत्तरदायी नहीं है।
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