दो से तीन गुना तक बढ़ा लिया कई होटलों का परिसरों, नगर निगम ने खुद नपाई की तो सामने आई गड़बड़ी
टैक्स के बिल भी अब नए सिरे से होंगे जारी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में प्राॅपर्टी टैक्स (संपत्ति कर) की चोरी करने वालों पर बिठाई नगर निगम की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। शहर के मालरोड पर चल रहे नामी होटल बड़े पैमाने पर प्राॅपर्टी टैक्स की चोरी कर रहे हैं। नगर निगम टीम ने जब खुद मौके पर जाकर नपाई की तो यह गड़बड़ी पकड़ी गई।
इनमें कई होटल ऐसे मिले हैं जिन्होंने अपने परिसरों का आकार दो से तीन गुना तक बढ़ा दिया है। यह नगर निगम को इसकी सूचना न देकर टैक्स की चोरी कर रहे थे। निगम इन्हें कई साल पहले बनाए भवन परिसर के आकार के अनुसार ही टैक्स के बिल जारी कर रहा था। अब गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद नगर निगम इन्हें संशोधित बिल जारी करेगा। शिमला शहर में 350 से ज्यादा होटल हैं। सैकड़ों व्यावसायिक परिसर भी हैं। बीते एक महीने के भीतर निगम टीम ने एक दर्जन से अधिक होटल और व्यावसायिक परिसरों में यह गड़बड़ी पकड़ी है। अब संबंधित होटल मालिकों को नोटिस भी जारी किए जा रहे हैं। नगर निगम का कहना है कि शहर में बने सभी व्यावसायिक और होटल परिसरों की जांच की जा रही है। निगम ने एक एजेंसी से शहर में बने भवनों का ड्रोन सर्वे भी करवाया है। इस सर्वे के बाद डोर टू डोर सर्वेक्षण भी करवाया जा रहा है। इस सर्वे में भी निगम को बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी का पता लगा है।
आज टैक्स बिल जारी करने पर बैठक
शहरवासियों को इस साल नए सर्वे के अनुसार टैक्स के बिल जारी होंगे या नहीं, इस पर शनिवार को नगर निगम में बैठक भी होनी है। इसमें टैक्स बिल जारी करने, इसके साॅफ्टवेयर के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा होगी। नगर निगम ने अभी शहर में लोगों को टैक्स के बिल जारी करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। इसे शुरू करने को लेकर बैठक में फैसला लिया जाना है। नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि टैक्स चोरी करने वालों का पता लगाया जा रहा है। इसमें जिन परिसरों में गड़बड़ी सामने आ रही है, उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
शहर में 32 हजार हैै भवन मालिक
शहर में 32 हजार भवन मालिकों से नगर निगम प्राॅपर्टी टैक्स वसूलता है। रिहायशी भवनों से घरेलू दरों जबकि व्यावसायिक परिसरों का कॉमर्शियल रेट पर टैक्स लिया जाता है। अभी तक टैक्स का निर्धारण लोगों की ओर से जमा किए रिकॉर्ड से किया जाता है। लोग आवेदन कर बताते हैं कि उनके भवन का आकार क्या है और इसका क्या इस्तेमाल हो रहा है। इसी आधार पर निगम बिल जारी करता है। अब जांच में सामने आ रहा है कि हजारों लोग ऐसे हैं जो किसी न किसी रूप में टैक्स की चोरी कर रहे हैं। कई लोग भवन का आकार कम बता रहे हैं तो कई ऐसे हैं जिन्होंने रिहायशी भवनों में गुपचुप व्यावसायिक गतिविधियां चला रखी हैं। जांच में इनका आंकड़ा तीन से पांच हजार हो सकता है।