हिमाचल प्रदेश के ऊना शहर के ही रहने वाले दीपक ठाकुर को चरणजीत सिंह के छोटे भाई और हॉकी कोच भूपिंद्र सिंह ने ही खेल के गुर सिखाए। वहीं, चंबा जिले के हॉकी खिलाड़ी वरुण कुमार ने कहा कि चरणजीत सिंह से प्रेरणा लेकर वे हॉकी के क्षेत्र में आगे बढ़े।
पद्मश्री चरणजीत सिंह से प्रेरणा लेकर हॉकी खिलाड़ी और ओलंपियन दीपक ठाकुर ने बुलंदियां छूई हैं। हिमाचल प्रदेश के ऊना शहर के ही रहने वाले दीपक ठाकुर को चरणजीत सिंह के छोटे भाई और हॉकी कोच भूपिंद्र सिंह ने ही खेल के गुर सिखाए। दोनों की प्रेरणा से ही दीपक ठाकुर ओलंपिक तक पहुंच पाए हैं। वर्तमान में दीपक ठाकुर इंडियन ऑयल में एक वरिष्ठ पद पर तैनात हैं।इंदिरा मैदान में भूपिंद्र सिंह के साथ चरणजीत सिंह पहुंचते थे और खेल को लेकर अभ्यास करवाते थे। खास बातचीत में फोन पर दीपक ठाकुर ने बताया कि चरणजीत सिंह ने ही उनकी माता को उन्हें हॉकी खेल में डालने के लिए प्रेरित किया था।
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उन्हीं की ही बदौलत उनकी हॉकी खेल में शुरूआत हुई। बताया कि उन्होंने शुरू में ही उनके लिए कहा था कि वह राष्ट्रीय खिलाड़ी बनेगा। चरणजीत सिंह के निधन से बेखबर दीपक ठाकुर को जब यह पता चला वह स्तब्ध रह गए। उन्होंने चरणजीत सिंह के निधन को उनके लिए व्यक्तिगत क्षति बताया। कहा कि वह हिमाचल की शान रहे हैं। उन्होंने हमेशा चरणजीत सिंह के पद चिन्हों पर अनुसरण किया है, लेकिन वह उन जैसा मुकाम हासिल नहीं कर पाए।
पिछले साल टोक्यो ओलंपिक टीम में भारतीय टीम का हिस्सा रहे चंबा जिले के हॉकी खिलाड़ी वरुण कुमार ने कहा कि चरणजीत सिंह से प्रेरणा लेकर वे हॉकी के क्षेत्र में आगे बढ़े। हिमाचल प्रदेश में खेल प्रतिभाएं तो बहुत हैं। लेकिन, उस स्तर के खेल मैदान और उम्दा कोचों की कमी है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में यूथ हॉकी को एक बार नई बुलंदियों पर ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा। जिसके लिए वर्तमान में सरकार भी प्रयासरत है।
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चंबा जिले के डलहौजी से ताल्लुक रखने वरुण के पिता पेशे से ट्रक ड्राइवर हैं, जो पंजाब के जालंधर में मिट्ठापुर गांव में ट्रक चलाकर गुजर-बसर करते हैं। वरुण ने डीएवी स्कूल में पढाई की है। 25 जुलाई 1995 को जन्मे वरुण कुमार डलहौजी उपमंडल की ओसल पंचायत के रहने वाले हैं।