यह वायरस सूअर से आता है। कई बार व्यक्ति सोचता है कि वह सूअर के नजदीक नहीं गया लेकिन यह वायरस फैल चुका होता है। पीड़ित मरीज 3 दिन तक दवाइयां खाता है और परिवार के सदस्य मरीज के आसपास रहते हैं। ऐसी स्थिति में यह वायरस दूसरे व्यक्ति के शरीर में भी प्रवेश कर चुका होता है।
डॉक्टर से सलाह लेने के बाद लें दवाइयां
डॉक्टरों का मानना है कि बुखार आने की स्थिति में लोग पैरासिटामोल और एंटीबायोटिक दवा न लें। अस्पताल में डॉक्टरों से जांच करवाने के बाद ही पर्ची में लिखी गई दवाइयों का सेवन करें।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सचिवालय में स्वाइन फ्लू के मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक ली। इस अवसर पर मुख्य सचिव वीके अग्रवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव सीएम श्रीकांत बाल्दी के अलावा अन्य स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बीमारी से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही। बैठक में उन्होंने स्वाइन फ्लू को लेकर अब तक किए गए इंतजाम के बारे में विस्तृत चर्चा की।
दो दिन के बंगलूरू और हैदराबाद तूफानी दौरे के बाद शुक्रवार को शिमला लौटते ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने ताबड़तोड़ बैठकें की। पहले दो घंटे की मंत्रिमंडल की बैठक की। इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य अफसरों से स्वाइन फ्लू के बारे में जानकारी हासिल की। स्वास्थ्य अधिकारियों ने सीएम को बताया कि स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीजों को घर घर दवाइयां बांटी जा रही है। जिला और ब्लाक स्तर पर स्वास्थ्य कर्मचारियों की टीमें गठित की गई है। इसके साथ ही लोगों को लगातार एडवाइजरी जारी की जा रही है।
गांव में पंपलेट बांटे जा रहे हैं। इसमें लोगों को बीमारी के लक्षण, उपचार के बारे में अवगत कराया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बैठक में बताया कि हिमाचल में तीन स्थानों पर स्वाइन फ्लू के टेस्ट हो रहे हैं। इसमें आईजीएमसी शिमला, डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज टांडा और केंद्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली में मरीजों के सैंपल भेजे जा रहे है। एक दिन के भीतर मरीजों की रिपोर्ट आ रही है। बीमारी पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है।