आईजीएमसी में स्वाइन फ्लू से रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी की मौत के बाद डेंटल कॉलेज का एक कर्मचारी भी इस बीमारी की चपेट में आ गया है। यह कर्मी प्रास्थोडॉन्टिक्स विभाग में कार्यरत है। यह वह विभाग है जिसके हेड कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आरपी लुथरा हैं। कॉलेज के ही एक कर्मी को स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने से कॉलेज में हड़कंप मच गया है।
इस विभाग में कुल 40 लोगों का स्टाफ है। इसमें पीजी डॉक्टर तक शामिल है। हवा के संपर्क से यह रोग अन्य में भी फैलने की आशंका बनी है। बुधवार को अपने ही विभाग के कर्मी की स्वाइन फ्लू रिपोर्ट पॉजिटिव होने की सूचना मिलने के बाद कर्मियों और डॉक्टरों में दहशत बैठ गई है। आनन फानन में इन्होंने फ्लू से बचने के लिए मुंह पर मास्क पहने।
दूसरी ओर कई कर्मी दवा लेने के लिए एमएस डॉ. रमेश चंद और डॉ. साद रिजवी मिले। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजीएमसी की ओर से इन कर्मियों के लिए दवाएं उपलब्ध करवाई गई। दोपहर तक अपने ही कर्मी को स्वाइन फ्लू की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। डॉक्टर एक दूसरे को सचेत करते रहे।
जिनके पास मास्क नहीं था वे स्वेटर और कमीज से मुंह ढककर यहां पहुंचे। स्वाइन फ्लू को लेकर पूरे कॉलेज में दहशत का माहौल है। कॉलेज ने अपने स्तर पर बीमारी से बचाव को लेकर एहतियात बरतना शुरू कर दी है। डेंटल कॉलेज के एक कर्मी को स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद ने की है।
अपने ही अस्पताल पर भरोसा नहीं, पीजीआई गया कर्मी
रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी की मौत से आईजीएमसी में दी जाने वाले स्वास्थ्य सेवाओं से स्टाफ का भरोसा ही उठ गया है। डेंटल कॉलेज के करीबी सूत्रों की मानें तो मंगलवार शाम तक उनके कर्मी को आईजीएमसी में चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया था। अगले ही दिन यह कर्मचारी पीजीआई इलाज के लिए चला गया है।
साफ है कि अस्पताल के स्टाफ का भरोसा ही यहां के चिकित्सकों से उठ गया है। एचओडी की मौत के बाद आईजीएमसी की सेवाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अपने ही कर्मी के इलाज के लिए पीजीआई चले जाने के बाद अस्पताल पर कई सवाल फिर से खड़े हो गए हैं। आईजीएमसी प्रबंधन फिर से मुंह सिल चुका है।