स्वाइन फ्लू से हर महीने दर्जनों लोगों की मौत हो रही है। देश के कई राज्यों में तो सरकारें इसी बीमारी को रोकने का जोर लगा रही है। स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए सामान्य मास्क भी कारगर साबित नहीं हो रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि इसके लिए थ्री लेयर सर्जिकल मास्क को चार घंटे तक और एन.95 मास्क को आठ घंटे तक लगाकर रख सकते हैं। मगर यदि आप इस बीमारी के शुरुआती लक्ष्ण पहचान सकते हैं तो आप इस बीमारी से बच सकते हैं।
शिमला के आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश का कहना है कि इस बीमारी को लेकर इंतजाम पूरे हैं। डाक्टरों और पैरामेडिकल टीम का गठन कर लिया है। जानिए इस बीमारी के लक्ष्ण और उनसे बचने के उपाय।
ये हैं स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण
•नाक का लगातार बहना, छींक आना, नाक जाम होना।
•मांसपेशियों में दर्द या अकड़न महसूस करना।
•सिर में भयानक दर्द।
•कफ, ठंड और लगातार खांसी
•उनींदे रहना बहुत ज्यादा थकान महसूस होना।
•बुखार होना, दवा खाने के बाद भी बुखार का बढ़ना।
•गले में खराश होना
इन बातों का रखें ध्यान
•खांसी या छींक आने पर रुमाल या टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें।
•इस्तेमाल किए मास्क या टिश्यु पेपर को ढक्कन वाले डस्टबिन में फेंकें।
•थोड़ी-थोड़ी देर में हाथ को साबुन और पानी से धोते रहें।
•लोगों से मिलने पर हाथ मिलाने, गले लगने या चूमने से बचें।
•फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करें।
•फ्लू के लक्षण नजर आते हैं तो दूसरों से 1 मीटर की दूरी पर रहें।
•फ्लू के लक्षण दिखने पर घर पर रहें। आफिस और अन्य जगह न जाएं।
•बिना धुले हाथों से आंख, नाक या मुंह छूने से परहेज करें।
स्वाइन फ्लू श्वास तंत्र से जुड़ी बीमारी
स्वाइन फ्लू श्वास तंत्र से जुड़ी बीमारी है। यह ए टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है। यह वायरस एच1 एन1 के नाम से जाना जाता है और मौसमी फ्लू में भी यह वायरस सक्रिय होता है।
जब आप खांसते या छींकते हैं तो हवा में या जमीन पर या जिस भी सतह पर थूक या मुंह और नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं वह वायरस की चपेट में आ जाता है। यह कण हवा से या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिये प्रवेश कर जाते हैं।
उदाहरण के तौर पर दरवाजे, मोबाइल, फोन कीबोर्ड या रिमोट कंट्रोल के जरिये भी यह वायरस फैल सकते हैं। इन चीजों का इस्तेमाल किसी संक्रमित व्यक्ति ने किया हो। पीसी आर टेस्ट के माध्यम से ही यह पता चलता है कि किसी को स्वाइन फ्लू है।
5 साल से कम उम्र के बच्चे, 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले और डायबिटीज से ग्रसित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत रहती है। ऐसे लोगों को फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।