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Shimla News: शहर में 24 घंटे पानी देने की योजना में बड़े गोलमाल का अंदेशा, जांच के आदेश

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अमर उजाला एक्सक्लूसिव
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मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी हुए जांच के आदेश, दो वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा जिम्मा, कंपनी से रिकॉर्ड तलब
शुरुआती जांच में कार्यान्वयन में सामने आईं कई कमियां
निर्माण कार्य में देरी के बावजूद ठेकेदार कंपनी पर मेहरबानी

अशोक चौहान
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पानी देने की योजना के काम में बड़े गोलमाल की आशंका जताई गई है। सरकार ने इस योजना के तहत किए जा रहे कार्य की जांच के आदेश दिए हैं।
यह आदेश मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी किए गए हैं। शहरी विकास विभाग के निदेशक नीरज कुमार और हिमाचल प्रदेश रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के निदेशक पवन शर्मा की समिति को मामले की जांच का जिम्मा सौंपा है। समिति ने पेयजल कंपनी से योजना से संबंधित पूरा रिकॉर्ड भी तलब किया है। सूत्रों के अनुसार रिकॉर्ड की शुरुआती जांच में कई कमियां सामने आई हैं। योजना के कार्यान्वयन में लापरवाही के संकेत मिले हैं। काम में देरी के बावजूद ठेकेदार कंपनी पर पेनल्टी नहीं लगाने की बात भी सामने आई है। जांच समिति अब अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है। आने वाले दिनों में रिपोर्ट मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को सौंपी जानी है।
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मामला राजधानी में 24 घंटे पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की योजना से जुड़ा है। शिमला जल प्रबंधन निगम ने करीब 972 करोड़ रुपये के इस मेगा प्रोजेक्ट का काम एक नामी कंपनी को सौंपा है। योजना के तहत शहरवासियों को पर्याप्त दबाव के साथ पानी की आपूर्ति की जानी है। इसके लिए शहर में नई पेयजल लाइनें बिछाने के साथ ही नए टैंकों का निर्माण किया जाना है। हालांकि विश्व बैंक के साथ मिलकर तय किए लक्ष्यों के मुकाबले ठेकेदार कंपनी ने शहर में काफी कम काम किया है। इसके बावजूद कंपनी पर मेहरबानी किए जाने के आरोप हैं। योजना के काम को लेकर मुख्यमंत्री को शिकायत मिली थी। इसके बाद सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उधर शहर की जनता को भले ही अभी 24 घंटे पानी की सुविधा नहीं मिल रही हो लेकिन योजना के काम को लेकर यह मामला जरूर चर्चा में आ गया है।
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अहम इनसेट
शिकायत में बताई थीं यह कमियां, जांच में आईं सामने
5,500 कनेक्शन देने थे, नई लाइन से अभी एक भी कनेक्शन नहीं दिया गया
19 टैंक बनने हैं लेकिन अभी तक एक भी तैयार नहीं हुआ।
136 किलोमीटर लंबी लाइन बिछनी थी लेकिन सिर्फ 51 किलोमीटर ही बिछ पाई।
27 किलोमीटर सप्लाई फीडर में से अभी तक सिर्फ 5 किलोमीटर ही बिछाया गया।
नॉन-राजस्व वाटर पर 0 फीसदी काम हुआ, प्लान तक नहीं सौंपा गया।

पानी की क्लोरीनेशन को लेकर ठेकेदार कंपनी ने कोई काम नहीं किया।


कोट
अभी चल रही है जांच
इस मामले की जांच अभी चल रही है। पेयजल कंपनी से जो रिकॉर्ड मांगा था, वह लगभग सारा मिल चुका है। अब रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जल्द ही रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर सरकार को सौंपा जाएगा।
-नीरज कुमार, निदेशक, शहरी विकास विभाग
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