मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि जब वे प्रदेश अध्यक्ष थे तो सुरेश कश्यप को पहली बार टिकट दिया गया था। उन्होंने कहा कि नए प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप के परिवार की कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है। इन्होंने राजनीति में आने की शायद कल्पना भी नहीं की थी। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद घर आए तो गांववालों ने ब्लॉक समिति का चुनाव लड़ने को कहा। जीतने के बाद समिति के सदस्य रहे। कुछ लोगों ने पार्टी में शामिल होने को कहा तो वर्ष 2006 में भाजपा को ज्वाइन किया। नए पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप के पदभार ग्रहण करने के बाद पीटरहॉफ शिमला में आयोजित कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि पच्छाद हलके में हम लगातार हारे थे।
2007 के चुनाव के समय पार्टी अध्यक्ष होने के नाते वरिष्ठ नेताओं से नए व्यक्ति को ढूंढने की बात कही। जब बात चली तो सुरेश कश्यप का नाम आया तो हमने कहा कि उचित रहेगा कि इन्हें टिकट दिया जाए। जीत नहीं पाए, मगर कड़े मुकाबले में रहे। वर्ष 2012 में इन्होंने आठवीं बार जीतने की उम्मीद लगाए बैठे कांग्रेस नेता को हराकर उस दुर्ग को ध्वस्त किया। वर्ष 2017 में भी चुनाव जीते। यह वह भाजपा पार्टी है, जो साधारण कार्यकर्ता को भी मौका देती है। कश्यप ने पिछले लोकसभा चुनाव में भी रिकॉर्ड जीत दर्ज की। अब अध्यक्ष बने हैं। पार्टी कार्यालय दीपकमल शिमला में नए अध्यक्ष सुरेश कश्यप के पदभार ग्रहण समारोह के बाद राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ में कार्यक्रम हुआ।
सुरेश कश्यप छुपा हुआ हीरा, इन्हें नड्डा ने पहचाना
पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि आज सुरेश कश्यप को एक नया दायित्व मिला है। सुरेश कश्यप शालीन स्वभाव के हैं। वह छुपा हुआ हीरा हैं। इस हीरे की पहचान राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और केंद्रीय नेतृत्व ने की है। हमारा तो पड़ोसी का भी संबंध है। पच्छाद से हैं और नाहन में रहते हैं। भाजपा ने अनुसूचित जाति वर्ग को स्नेह दिया है।