शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश के 52 फीसदी युवा नशाखोरी की चपेट में आ गए हैं। प्रदेश के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय है। नशे के कारोबार पर लगाम लगाना सिर्फ पुलिस का काम नहीं रह गया है। इसके लिए पूरे समाज को जागरूक होना होगा।
अभिभावकों का इसमें सबसे अधिक सहयोग अपेक्षित है। अभिभावकों को नशे की चपेट में जा रहे युवाओं को रोकने के लिए आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि एक फीसदी नंबर भी कम आ जाए तो पेरेंट्स दबाव बनाते हैं।
इससे बच्चा नशे की ओर चला जाता है। अगर नशे की प्रवृत्ति को जल्द नहीं रोका गया तो वो दिन दूर नहीं जब हिमाचल भी पंजाब बन जाएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल केरल के बाद शिक्षा के क्षेत्र में दूसरे नंबर पर है। पेरेंट्स व शिक्षकों को नशे के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होना होगा।
इसके लिए स्कूलों और घरों में बच्चों को नैतिक कक्षा देनी होगी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि नशे पर रोकथाम लगाने के लिए सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है। नए भारत के निर्माण के लिए हमें मिलकर काम करना होगा। देेवभूमि को बचाने के लिए सभी को एक साथ आकर नशे से लड़ना होगा।