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सुर्पीम कोर्ट के आदेश, शिमला के लिए शुरू हो विमान सेवा

Fri, 22 Apr 2016 11:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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शीर्ष अदालत ने पर्याप्त संख्या में विमानों की आवाजाही का निर्देश दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने नागर विमानन महानिदेशालय को यह सुनिश्चित करने को कहा कि शिमला में विमानों की आवाजाही जल्द शुरू हो। शीर्ष अदालत ने पर्याप्त संख्या में विमानों की आवाजाही का निर्देश दिया है। अदालत ने एक बार फिर सवाल उठाया कि क्यों मुनाफे वाले रूट पर ही एयरलाइंस सेवाएं देना चाहती हैं।
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नागर विमानन महानिदेशालय और  एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पीएस पटवालिया ने चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि शिमला को बी-श्रेणी वाले हवाईअड्डों की सूची में डाला गया है। यानी अब शिमला कश्मीर, अंडमान-निकोबार, लक्ष्यद्वीप और उत्तर पूर्व राज्यों वाली श्रेणी में शामिल हो गया है।

नियम केमुताबिक, ए-श्रेणी के हवाईअड्डों (दिल्ली, मुंबई, कोलकाता आदि मेट्रो शहर) में विमानों की आवाजाही का 10 फीसदी बी-श्रेणी में होना जरूरी है। हालांकि पीठ ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि कश्मीर बी-श्रेणी के हवाईअड्डों की सूची में है। पीठ ने कहा कि कश्मीर में तो विमान सेवाएं अच्छी हैं, तो उसे इस श्रेणी में क्यों रखा गया है। आखिर कश्मीर की तुलना शिमला से कैसे की जा सकती है।
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पीठ ने कहा है कि अगर अगली सुनवाई तक शिमला में विमान सेवा शुरू  करने पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वह आदेश पारित करेगी। हालांकि नागर विमानन महानिदेशालय ने सेवा शुरू करने पर सहमति जताई है। अदालत ने एयर इंडिया, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, नागर विमानन महानिदेशालय सहित तमाम अथॉरिटी और एयरलाइंस को इस बारे में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।

सुनवाई के दौरान जेट एयरवेज की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि फिलहाल हमारे पास ऐसे एयरक्राफ्ट नहीं हैं, जिन्हें शिमला के रूट पर लगाया जा सके। हालांकि जेट एयरवेज चाहता है कि सभी के लिए समान अवसर मिलें। मालूम हो कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा था कि एयरलाइंस कंपनियों को सिर्फ मुनाफे वाले रूट पर ही सेवाएं नहीं देनी चाहिए बल्कि दिल्ली-शिमला जैसे अलाभकारी या खर्चीले रूट पर भी सेवाएं देनी चाहिए।
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