सुप्रीम कोर्ट ने पेंशन से जुड़े मामले में हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी राहत दी है। भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को 1000 से 3000 की बजाय 1000 से 30 हजार रुपये या इससे अधिक पेंशन सेवा अवधि और वेतन अनुसार मिलेगी।
वर्ष 1995 से सेवानिवृत्त पेंशनरों को भी इतना ही लाभ मिलेगा, हालांकि, उन्हें अपने मामले विभाग के समक्ष उठाने होंगे। हिमाचल हाईकोर्ट की खंडपीठ के निर्णय को रद्द करते हुए उच्चतम न्यायालय ने इसी कोर्ट की एकल पीठ के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है।
उच्चतम न्यायालय ने भविष्य निधि संगठन को आदेश दिए हैं कि निगम कर्मचारियों के मूल वेतन और महंगाई भत्ते की कुल राशि के 8.33 फीसदी हिस्से को नियोक्ता के हिस्से में से वर्ष 1995 से पेंशन निधि में शामिल किया जाए।
याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार जब से प्रदेश में पर्यटन निगम की स्थापना हुई तब से पर्यटन निगम अपने कर्मचारियों के मूल वेतन और महंगाई भत्ते की कुल राशि का 10 फीसदी और 12 फीसदी हिस्सा काटकर तथा इतना ही हिस्सा नियोक्ता अंशदान का डालकर भविष्य निधि संगठन में जमा करवाता रहा है।
16 नवंबर 1995 से भविष्य निधि संगठन ने अपने अंशधारकों के लिए एक पेंशन स्कीम शुरू की। इस स्कीम के तहत यह प्रावधान था कि कर्मचारी और नियोक्ता इस योजना में नियोक्ता के अंशदान में से कर्मचारी के मूल वेतन और महंगाई भत्ते की कुल राशि का 8.33 फीसदी या 5000 रुपये में से अधिकतम का 8.33 फीसदी हिस्सा ही इस फंड में जमा करवा सकता था। इसे बाद में 6500 रुपये और 15000 किया गया।