सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने कहा है कि राजधानी शिमला की खूबसूरती को अवैध निर्माण दाग लगा रहा है। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ नगर निगम को सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए। बुधवार को निगम सदन में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों से कहा कि जिन लोगों ने विश्वास जताकर सत्ता तक पहुंचाया है, उनकी अनदेखी न करो।
सिर्फ चुनाव के समय लोगों के बीच न जाएं, हर दो माह में लोगों से बैठके करें। निगम प्रशासन के लिए जो समस्याएं छोटी होती हैं वही किसी परिवार या मुहल्ले के लिए बहुत बड़ी समस्या हो सकती है। ऐसे में लोगों से परस्पर संपर्क बनाकर रखें। न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने निगम सदन में बेबाक राय देते हुए कहा नियम कानून सभी के लिए बराबर हैं। प्रभावशाली के आगे झुकना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि जब 2004 में वह शिमला आए थे तो शहर बहुत खूबसूरत था लेकिन जब 2010 में हाईकोर्ट में उनकी नियुक्ति हुई तो एकाएक शहर में बहुत बदलाव देखा।
अवैध निर्माण न हो, इसका इंतजाम करना चाहिए न कि बाद में कार्रवाई का इंतजार करना चाहिए। 90 प्रतिशत मामलों में अवैध निर्माण लालच के लिए होता है जरूरत के लिए नहीं। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि अपनी जिम्मेवारी को सही से निभाएं। उन्होंने पार्षदों को भी आत्ममंथन करने की सलाह दी। कहा कि सोचने का समय आ गया है कि हम शिमला को संवार रहे हैं या बिगाड़ रहे। इस अवसर पर रजिस्ट्रार जनरल सीबी बरोबालिया, जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह, सीजेएम मदन शर्मा और प्रताप ठाकुर सहित कई अन्य गणमान्य मौजूद रहे।
नेता बनने के बजाए पब्लिक सर्वेंट बनें
न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों को कहा आप स्वयं को नेता न समझें। आप पब्लिक सर्वेंट हैं। लोगों की सेवा करने के लिए आपको चुना है। अफसरशाही भी पब्लिक सर्वेंट है।
ई समाधान प्रणाली विकसित करे एमसी
कुरियन जोसेफ ने कहा कि लोगों की समस्याओं का समयबद्ध निवारण होना चाहिए। नगर निगम को प्रभावी ई समाधान प्रणाली विकसित करनी चाहिए। छोटी-छोटी समस्याओं के लिए परेशान नहीं करना चाहिए। समस्या हल नहीं हो रही हो तो कर्मी को उच्च अधिकारी को बताना चाहिए।
संपत्ति की घोषणा करने की अपील
कुरियन जोसेफ ने नगर निगम के निर्वाचित प्रतिनिधियों से अपनी चल अचल संपत्ति की सार्वजनिक घोषणा करने की अपील की। इससे लोगों को मालूम होगा कि उनके प्रतिनिधि के पास क्या-क्या है। इससे कामकाज में पारदर्शिता भी आएगी।