अधिसूचना के अनुसार जिला शिमला और मंडी के विभिन्न गांवों में कुल 09-10-99 हेक्टेयर (117-12-11 बीघा) निजी भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। शिमला जिले की सुन्नी और कुमारसैन तहसीलों के मंगना, लुंसू, जैशी, भरारा और माजरोग गांवों के अलावा मंडी जिले की करसोग तहसील के भौरा, जकलीन, मगन, फाफन, परलोग, बेलुधांक और खारयाली गांव इस दायरे में आएंगे। परियोजना से जुड़े सामाजिक प्रभाव आकलन में स्पष्ट किया गया है कि भूमि अधिग्रहण के बावजूद किसी भी परिवार के विस्थापित होने की संभावना नहीं है। यह रिपोर्ट संबंधित जिला प्रशासन की ओर से गठित टीम और सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट यूनिट के अध्ययन के बाद तैयार की गई है।
अधिसूचना जारी होने के साथ ही प्रभावित क्षेत्र की भूमि पर खरीद-फरोख्त और किसी भी प्रकार के हस्तांतरण पर रोक लगा दी गई है। अब बिना अनुमति के कोई भी व्यक्ति भूमि का लेनदेन नहीं कर सकेगा। यह प्रावधान भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 की धारा 11(4) के तहत लागू किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुन्नी बांध जलविद्युत परियोजना के पूर्ण होने पर प्रदेश की ऊर्जा उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह परियोजना न केवल बिजली उत्पादन को बढ़ाएगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे को भी मजबूती देगी।