नवविवाहिता और नवजात ने मूंगफली, गोला, बादाम, छुआरे से तैयार की माला, माथा पट्टी और कंगन पहने
आग जलाकर लोगों ने मूंगफली, गजक, रेवड़ी डालकर किया हवन
लोगों ने मंदिरों, गुरुद्वारों में टेका माथा, सुख-शांति की मांगी दुआ, बाजारों में जमकर हुई खरीदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में सोमवार को लोहड़ी पर्व धूमधाम से मनाया गया। लोगों ने मंदिरों, गुरुद्वारों में दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। बाजारों में लोहड़ी के लिए मूंगफली, गजक और मिठाइयों की जमकर खरीदारी की। वहीं रात के समय आग जलाकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अग्निदेव को मूंगफली, गजक, रेवड़ी अर्पित कर हवन डाला।
नवविवाहिताओं ने सुख-शांति के लिए मूंगफली, गोला, बादाम, छुआरे से तैयार की माला, माथा पट्टी और कंगन यानी झटका पहनकर पति संग पूजा की। वहीं, नवजात की रक्षा के लिए झटका पहनाया गया। सुंदर, मुंदरिए लोकगीत के साथ बच्चों ने लोहड़ी मांगी।
लोहड़ी पर्व पर बाजारों में भी चहल-पहल रही। लोगों ने मूंगफली, गजक, रेवड़ी, तिल, गुड़ और कपड़ों की जमकर खरीदारी की। लोहड़ी पर बाजारों में गिफ्ट और कपड़ों पर काफी छूट दी गई। विवाह के लिए भी लोगों ने कपड़ों की जमकर खरीद की। दुकानों में गिफ्टस आइटम, महिलाओं की शृंगार सामग्री (कॉस्मेटिक) खरीदने के लिए लोगों की भारी भीड़ लगी रही। शहर में जगह-जगह दुकानदारों ने मूंगफली, गजक और रेवड़ियों के स्टॉल लगाए। देर शाम तक इन स्टॉलों पर लोगों की भीड़ लगी रही। संगे-संबंधियों को देने के लिए भी लोगों ने मूंगफली की खरीदारी की।
वहीं लोहड़ी पर दुकानदारों ने स्पेशल मिठाइयां तैयार कर स्टॉल लगाए। मिठाइयों की भी लोगों ने जमकर खरीदारी की। पंजाब राज्य के साथ लगते ऊना जिले में लोहड़ी पर्व हर साल हर्षोलास से मनाया जाता है। सोमवार को लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पर्व मनाया।
लोहड़ी की संध्या पर लोगों ने अग्नि प्रज्जवलित कर हवन किया। अग्नि देव को मूंगफली, गुड़, गजक, रेवड़ी के साथ मिष्ठान अर्पित किया। कई स्थानों पर लोकगीत और सुंदर मुंदरिए नाच गाना कर पर्व मनाया। नवविवाहिता और नवजात की खुशहाली के लिए मूंगफली, गोला, गरी, बादाम, छुआरा, दाख, मक्खाने से तैयार की माला, माथा पट्टी, हाथों के कंगन जिसे पारंपरिक भाषा में झटका का जाता है पहनकर अग्निदेव की पूजा-अर्चना की। नवविवाहिता ने पति संग अग्नि में हवन डाला। नवजात की रक्षा के लिए उसे झटका पहनाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में आस-पड़ोस से लोगों ने इकट्ठा होकर सुंदर मुंदरिए होए, तेरा कौन बेचारा लोकगीत गाया और बधाइंयां बांटी।