पांच लाख लोगों की आस्था से जुड़ा मां शूलिनी मेले का भविष्य अब मां शूलिनी पर ही छोड़ दिया है। मेले के दौरान जब पुजारी में मां शूलिनी का प्रवेश होगा उस समय मां को प्रशासन का निर्णय बताया जाएगा।
इसमें प्रशासन ने कारोबारियों और कल्याणों को आधे-आधे रास्ते तक पालकी उठाने का जिम्मा सौंपा है। यदि मां इस निर्णय को स्वीकार करती है तो यही निर्णय रहेगा।
यदि मां किसी भी पक्ष को पालकी उठाने में मनाही करती है तो उसे वह मानना होगा और बरसों पुरानी चली आ रही रित बदलेगी। वहीं प्रशासन भी इसे सख्ती से लागू करेगा। यह भविष्य में भी लागू रहेगा। उपायुक्त के अनुसार हिंदू मान्यताओं में कई बार देवी देवताओं की राय पर ही इस तरह के झगडे़ निपटाए जाते हैं।