पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और विधायक सुखविंद्र सुक्खू ने एक बार फिर विधायकों के लिए संपत्ति सार्वजनिक करने का कानून बनाने की मांग की है। सरकार ने चपरासी से लेकर अफसरों तक को संपत्ति का ब्योरा देने का लोकायुक्त कानून बनाया है।
इसे देखते हुए सुक्खू ने अपनी पुरानी मांग को दोबारा उठाया है। कहा कि इससे उनके जीवन में पारदर्शिता आएगी और जनता का विश्वास बढ़ेगा। सुक्खू ने कहा कि चपरासी और अफसरों को ही संपत्ति का ब्योरा देना जरूरी क्यों है?
यह विधायकों के लिए भी अनिवार्य होना चाहिए। वह विधानसभा के मानसून सत्र में नियम 101 के तहत विधायकों की संपत्ति और कर्ज सार्वजनिक करने संबंधी संकल्प लाए थे, लेकिन सरकार ने उस पर चर्चा नहीं कराई।
सरकार को विचार कर चर्चा करानी चाहिए थी। उनका संकल्प संपत्ति और कर्ज का ब्योरा बताने का कानून बनाने को लेकर ही था। सरकार उनके संकल्प पर आने वाले शीतकालीन सत्र में चर्चा कराकर कानून बनाए।
विधानसभा में संपत्ति और कर्जे सार्वजनिक करने के लिए एक वेबसाइट बने। उसमें संपत्ति, आय के स्रोत, कितना कर्जा है, क्या-क्या खरीदा है। यह बताना जरूरी हो। सुक्खू ने कहा कि सभी सम्मानित विधायक आयकर देते हैं।
फिर भी जब पांच साल बाद वे चुनाव लड़ने के लिए शपथ पत्र देते हैं तो उसमें संपत्ति बढ़ी होने पर उन्हें शक की निगाह से देखा जाता है। इसलिए कानून बनने पर हर साल संपत्ति, कर्जे और आय के स्रोत बताने होंगे।