फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विधायकों को लोग खिड़की से झांकते हैं, दरवाजा खटखटाकर कहते हैं- चाय लाओ: सुक्खू

Sat, 31 Aug 2019 07:46 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन

विधायकों-मंत्रियों के परिवार समेत निशुल्क यात्रा भत्ता बढ़ाने के विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए नादौन के कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि विधायक संघर्ष से बनता है। जब विधायक नहीं रहता तो जीवनयापन करना मुश्किल हो जाता है। खर्च बढ़ जाते हैं। वह कहना चाहते हैं कि इस विधेयक में तनख्वाह एक पैसे नहीं बढ़ाई गई। 

विज्ञापन


यह भी पढ़ें: 2.50 लाख से बढ़कर चार लाख हुआ मंत्री-विधायकों का यात्रा भत्ता, सिंघा ने जताया विरोध
सुक्खू बोले कि विधायकों को लोग खिड़कियों से झांकते हैं। जोर से दरवाजा खटखटाते हैं। कहते हैं कि चाय लेकर आओ। 2000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से खर्चा आता है। उनका नादौन तक गाड़ी में मासिक 30 से 40 हजार रुपये खर्च हो जाता है। विधायक बनने के लिए पार्टी में संघर्ष करना पड़ता है। टिकट के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: 100 इलेक्ट्रिक बसें खरीदेगी हिमाचल सरकार, आठ जिलों में चलेंगी, केंद्र से मिली मंजूरी
इसके बाद जनता की अदालत में जाना होता है। जनता चुनकर भेजती है। वह वीरभद्र सिंह और जयराम ठाकुर दोनों को ही मुबारकबाद देते हैं कि उन्होंने ध्यान दिया। एक डाक्टर को महीने में दो लाख रुपये मिलते हैं। विधायक का प्रोटोकॉल मुख्य सचिव के बराबर है। नाम इतना बड़ा है और दर्शन इतने छोटे हैं। कांग्रेस पार्टी इस बिल का समर्थन करती है।  

यह भी पढ़ें: हिमाचल: मंत्रियों और विधायकों के भत्ते बढ़े, नदी में बही युवती समेत ये रहीं प्रमुख खबरें

विज्ञापन

सुक्खू और सिंघा में नोकझोंक

सुक्खू बोले - सिंघा साहब! आप मैडम स्टोक्स के पद चिन्हों पर चले हैं। वह भी सेलरी का एक पैसा नहीं लेती थीं। इनके खर्चे पता नहीं कैसे चलते हैं। मैं अपने खर्चे की बात कर रहा हूं। वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए। इस पर चर्चा के बीच में ठियोग के माकपा विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि इन्होंने कुछ टिप्पणियां की हैं, इस पर कहने का मौका दिया जाए।

स्पीकर डॉ. राजीव बिंदल ने सिंघा को बोलने का मौका दिया तो वह बोले कि उनके बारे में जो सुक्खू ने कहा, वह क्या व्यंग्यपूर्ण था। वह यह कहना चाहते हैं कि ऐसा करने से सिग्नल क्या जाएगा। अगर प्रदेश में आर्थिक संकट है तो ऐसा करने की जरूरत नहीं है। 

विधायकों के क्वार्टर का आकार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की तरह : बिंदल 
जब सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि विधायकों को क्वार्टर दिए गए हैं, वे उनका किराया देते हैं। इसका किसी को पता नहीं होगा। बिजली का बिल देते हैं। इस पर स्पीकर डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि इनका भी साइज चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की तरह है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें