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कामयाबी: हिमाचल के सूख रहे झरनों में फिर फूट पड़ा पानी, जर्मनी फाइनेंशियल कॉरपोरेशन के सहयोग चली परियोजना

Wed, 14 May 2025 11:59 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

परियोजना के सहयोग से ड्राई स्टोन चैक डैम, फार्म पोंड बनाए गए और पौधरोपण किया गया। लोगों को स्थानीय वनस्पतियों से कई तरह की वस्तुओं को तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया।
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सूख रहे झरनों में फिर फूट पड़ा पानी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जर्मनी की एजेंसी के सहयोग से हिमाचल प्रदेश में सूख रहे झरनों में पानी लौट आया है। चंबा और कांगड़ा जिलों में जर्मनी फाइनेंशियल काॅरपोरेशन के सहयोग से चली परियोजना से यह सफलता मिली है। इस परियोजना के सहयोग से ड्राई स्टोन चैक डैम, फार्म पोंड बनाए गए और पौधरोपण किया गया। लोगों को स्थानीय वनस्पतियों से कई तरह की वस्तुओं को तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। राज्य सचिवालय में याेजना विभाग के समक्ष वन विभाग ने यह सफल कहानी रखी है। यह परियोजना 29 दिसंबर 2015 से 28 दिसंबर 2022 के बीच चली। इसकी अवधि को 29 दिसंबर 2022 से 30 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। यह हिमाचल प्रदेश वन पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु छत परियोजना जर्मन वित्तीय सहयोग यानी केएफडब्ल्यू जर्मन विकास बैंक के सहयोग से चल रही है। इसकी अवधि 10 साल 3 महीने की है।

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इस परियोजना में जिला चंबा के गांव सलाबग में एक जल संरक्षण पनिहार का निर्माण 7,40,000 रुपये की लागत से वर्ष 2022-23 में पूरा किया गया। इससे गांववासियों की पानी की कमी दूर हुई, जबकि उन्हें हर वर्ष गर्मियों में पेयजल संकट से जूझना पड़ता था। इसलिए स्प्रिंग शेड का निर्माण किया गया। जलस्रोत के ठीक ऊपर जंगल में परकोलेशन पोंड बनाया गया। नाले में वेजिटेटिव चेक डैम बनाए गए और बांस के पौधे लगाए गए। इस प्रक्रिया ने यहां पर सलाबग गांव के 30 से 40 लोगों की पानी की समस्या को दूर कर दिया। अब यहां पर गर्मियों में पेयजल संकट नहीं है। पहले एक लीटर पानी दो मिनट में स्टोर होता था, जो अब 25 से 30 सेकंड में होता है। इस परियोजना में ऐसे प्रयोग कई अन्य गांवों में भी किए गए हैं। नागेला, भटुईं और बंजाल में भी स्प्रिंगशेड बनाने का प्लान मंजूर हुआ है। इस परियोजना में 87 वर्मी कंपोस्ट पिट बनाए गए। जिला चंबा के किरी बंजाल क्षेत्र में देवदार, कैंथ, दाडू़ आदि का पौधरोपण किया गया, जिनका सर्वाइवल रेट 80 फीसदी तक है।
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