कल करवाचौथ है। सबसे खूबसूरत दिखने की चाहत में महिलाएं शॉपिंग और तैयारियों में मशगूल हो गई हैं। सुहाग की अहम निशानी चूड़ियों की खरीद इस समय जोर-शोर से चल रही है।
लहंगे और साड़ी के मैचिंग की चूड़ियां महिलाएं खरीद रही हैं वहीं डिजाइनर चूड़ियों के सेट भी तैयार करवा रही हैं। शिमला के लोअर, राम, मिडल और लक्कड़ बाजार सहित ओल्ड बस स्टैंड के अलावा उपनगर संजौली, छोटा शिमला, टुटू, ढली, कसुम्पटी, खलीनी, बालूगंज, बीसीएस और न्यू शिमला के बाजारों में भी चूड़ियों की दुकानें सज चुकी हैं।
करवाचौथ पर नई चूड़ियां पहनने के साथ करवा और चूड़ियां माता की पूजा में चढ़ाने का प्रचलन है। ड्रेस के कलर के साथ मैचिंग चूड़ियां पहनने के साथ आजकल डिजाइनर चूड़ियां, कलरफुल चूड़ियों का ट्रेंड है।
ऐसी चूड़ियां बनी पहली पसंद
महिलाएं एक हाथ में चूड़ियां और एक हाथ में बैंड, ब्रेसलेट या घड़ी पहनना पसंद करती हैं। पंजाबी चूड़ा भी काफी पसंद किया जा रहा है। लोअर बाजार के कारोबारी राजकुमार अग्रवाल, तरुण गुप्ता और अजय शर्मा ने बताया है कि सोने-चांदी की चूड़ियां हमेशा ही महिलाओं की पसंद रही हैं। करवाचौथ पर करीब 100 तरह की डिजाइन की चूड़ियां और कंगन हैं। हर लेडी की अपनी अलग पसंद होती है।
बदला चूड़ियों का मैटीरियल
स्टाइल के जमाने में चूड़ियों का मैटीरियल भी बदला है। चूड़ियां केवल कांच की नहीं रही। अब लकड़ी, लाख, प्लास्टिक, सिल्वर, मैटल और रेशम की चूड़ियां भी बाजार में हैं। इन्हें किसी भी ड्रेस के साथ मैच करके पहना जा सकता है। कुंदन, पर्ल और मीनाकारी की रंगबिरंगी चूड़ियां भी बाजार में हैं। चूड़ियों पर गोटा पत्ती रेशम के धागों का भी काम है।