हिमाचल में गिद्धों के कुनबे में आश्चर्यजनक रूप से बढ़ोतरी हुई है। वन्य प्राणी विभाग इसे बड़ी कामयाबी मान रहा है। वर्तमान में चूजों सहित गिद्धों का कुल आंकड़ा 789 पहुंच गया है। साल 2004-05 की बात करें तो इनकी संख्या केवल 75 थी। इनके घोंसलों में भी वृद्धि हुई है। यह संख्या 274 हो गई है। दस साल पहले महज 26 घोंसले थे।अब इनकी संख्या 274 पहुंच गई है।
वन्य जीव विभाग हमीरपुर के डीएफओ सुभाष पराशर के मुताबिक विभाग को शिवालिक की पहाड़ियों में गिद्धों की 35 प्रजनन कॉलोनियां भी मिली हैं। विभाग ने गिद्धों की प्रजाति को संरक्षित करने और इनकी संख्या बढ़ाने के लिए भोजन की व्यवस्था भी कर दी है। कांगड़ा जिले के पौंग डैम और नगरोटा सूरियां में विभाग ने दो फीडिंग स्टेशन बनाए हैं।
डिक्लोफिनेक दवाई से खत्म हो रही थी प्रजातिवर्ष 1990 में गिद्धों की संख्या में 95 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। विभाग ने जब इनकी संख्या कम होने के कारणों की खोज शुरू तो इसके लिए डिक्लोफिनेक नामक दवाई को बड़ा कारण माना गया। विशेषज्ञों का मानना था कि पशुपालक मवेशियों को यह दवाई देते हैं।
मवेशियों की मौत के बाद जब इन्हें खुले में फेंका जाता है तो मृत मवेशियों की के पूरे शरीर में इस दवाई का असर रहता है। मृत मवेशियों के मांस के सेवन से गिद्धों की मौत होने का दावा किया गया। इसके बाद दवा बैन कर दी गई थी।